गरुड़ झेप अकादमी कांड: कार्रवाई में देरी पर भड़का आयोग; पुलिस आयुक्त को समन की चेतावनी

Chhatrapati Sambhajinagar Atrocity Case News: गरुड़ झेप अकादमी में छात्र के साथ हुई मारपीट और जातिसूचक गालियों के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया।
Garud Zhep Academy Scandal: Commission Outraged Over Delay in Action; Warns of Summons to Police Commissioner
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Atrocity Case: छत्रपति संभाजीनगर के शरणापुर स्थित गरुड़ झेप अकादमी में हुए एट्रोसिटी मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने कड़ा रुख अपनाया है। कार्रवाई में देरी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार को नोटिस जारी कर 15 दिनों में विस्तृत 'कार्रवाई रिपोर्ट' मांगी है। आयोग ने चेतावनी दी कि जवाब न मिलने पर संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग कर अधिकारियों को दिल्ली तलब किया जा सकता है।

अमानवीय व्यवहार और घटना की पृष्ठभूमि

मामले की जड़ 23 फरवरी की घटना है, जिसमें नासिक के एक दलित छात्र के साथ अकादमी में अमानवीय व्यवहार किया गया। राकांपा शरद पवार गुट के नेता गौतम आमराव ने आरोप लगाया कि छात्र को बेरहमी से पीटा गया, भूखा रखा गया और जातिसूचक गालियां देकर जान से मारने की धमकी दी गई। इस संबंध में 28 फरवरी को दौलताबाद पुलिस स्टेशन में अकादमी संचालक व अन्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

गिरफ्तारी में देरी पर उठे गंभीर सवाल

एफआईआर दर्ज होने के डेढ़ महीने बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पुलिस आरोपियों के फरार होने का दावा कर रही है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक संरक्षण बताते हुए संदेह जताया है। आनंद खरात और विजय रणभरे जैसे पदाधिकारियों का कहना है कि आरोपियों का खुलेआम घूमना कानून-व्यवस्था के इकबाल को चुनौती है, जिससे पीड़ित परिवार में भारी भय का माहौल व्याप्त है।

न्याय की मांग और भविष्य की चुनौती

आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब स्थानीय पुलिस पर भारी दबाव है। गौतम आमराव और दलित संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई समाज के आत्मसम्मान की है। अब सबकी निगाहें पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार के अगले कदम पर टिकी हैं। यह मामला न केवल गरुड़ झेप अकादमी की साख पर धब्बा है, बल्कि यह भी तय करेगा कि जिले में एट्रोसिटी के मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय मिलता है या नहीं।

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