अवैध गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त: 24 घंटे हिरासत में रखना पड़ा महंगा; वकील को 75 हजार मुआवजा देने का आदेश
Bombay High Court: घरेलू हिंसा मामले में वसूली वारंट के आधार पर वकील की अवैध गिरफ्तारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने राज्य को 75 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
Aurangabad Bench Illegal Arrest Lawyer ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Aurangabad Bench Illegal Arrest Lawyer: छत्रपति संभाजीनगर घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में वसूली वारंट के आधार पर एक वकील को अवैध रूप से गिरफ्तार कर 24 घंटे तक हिरासत में रखने का मामला बेगमपुरा पुलिस थाने के एक पीएसआई को महंगा पड़ गया।
मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने इस कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए राज्य सरकार को संबंधित वकील को 75 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि संबंधित पुलिस अधिकारी से ही वसूल की है।
जाएगी।
मामले के अनुसार, औरंगाबाद जिला न्यायालय में वकालत करने वाले एड। मुकेश सुरेश प्रसाद के खिलाफ उनकी पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
सम्बंधित ख़बरें
सोलापुर दुर्घटना: 9 सालों से चल रहा सडक निर्माण, कंपनी के अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज
गुटखा-तंबाकू पर सख्ती का असर! कार्रवाई के डर से गड़चिरोली में बंद रहे पानठेले
नागपुर के गोलीबार चौक पर मनपा का ‘बुल्डोजर एक्शन’; अतिक्रमणकारियों में मची भगदड़
साहब आने वाले हैं… IAS तुकाराम मुंढे का खौफ! सिर्फ आने की अफवाह से मिनटों में बंद हो गए बड़े बाजार
PSI की कार्रवाई को अदालत ने बताया अवैध
इस प्रकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 19 हजार रुपये की वसूली के लिए वारंट जारी किया था। 4 अप्रैल 2023 को बेगमपुरा पुलिस थाने के पीएसआई एम. एस. गायकवाड ने इसी वारंट के आधार पर एड. प्रसाद को हिरासत में ले लिया हालांकि वारंट केवल राशि की वसूली के लिए जारी किया गया था, इसके बावजूद पीएसआई ने उन्हें गिरफ्तार कर रातभर पुलिस हिरासत में रखा, इस दौरान उन्हें अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति भी नहीं दी गई।
साथ ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डी. के. बसु मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया। अगले दिन न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए इसके बाद एड. प्रसाद ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर पांच लाख रुपये मुआवजे की मांग की।
यह भी पढ़ें:-प्रकाश आंबेडकर का ऐलान: मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन; नागपुर में RSS मुख्यालय की ओर मार्च
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति संदीप कुमार मोरे और न्यायमूर्ति आबासाहेब शिंदे की खंडपीठ ने पुलिस की कार्रवाई की गैरकानूनी बताते हुए राज्य सरकार को दो महीने के भीतर 75 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया, अदालत ने यह भी कहा कि यह राशि पीएसआई गायकवाड से वसूल की जाए।
