प्रदूषण के चलते मकबरा हो रहा काला, धुएं और कचरे से ऐतिहासिक धरोहर को खतरा

Heritage Conservation: ईंट-भट्टियों, वाहनों और कचरे से बीबी का मकबरा काला पड़ रहा है। संगमरमर और मीनारों में क्षरण दिखने लगा है। विशेषज्ञों ने हेरिटेज वॉक में चिंता जताई।
The mausoleum is turning black due to pollution; smoke and waste are threatening the historical monument
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Tourism: छत्रपति संभाजीनगर शहर की विश्वविख्यात ऐतिहासिक धरोहर पर बढ़ते प्रदूषण का गंभीर विपरीत प्रभाव दिखाई देने लगा है। आसपास की ईंट-भट्टियों, लगातार बढ़ते वाहनों, कचरे और धुएं के कारण मकबरे का संगमरमर काला पड़ता जा रहा है। मुख्य इमारत के साथ-साथ मीनारों में भी क्षरण स्पष्ट नजर आ रहा है।

इस स्थिति को देखकर इतिहास्टोमियों और विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर इंटैक और हिस्ट्री सोसायटी की ओर से आयोजित हेरिटेज वॉक में यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया, लगभग आठ वर्षों के अंतराल के बाद विविका मकबरा परिस्र में यह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई, जिसमें नागरिकों ने ऐतिहासिक धरोहर की वर्तमान स्थिति को नजदीक से देखा।

इस अवसर पर इतिहास की गहन अध्येता डॉ. दुलारी कुरैशी ने प्रतिभागियों को मकबरे के इतिहास, स्थापत्य शैली और संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को विस्तृत जानकारी दी। इंटैक की समन्वयक डॉ. माया वैद्य तथा आर्किटेक्ट आदित्य देशपांडे ने भी उपयोगी तकनीकी और ऐतिहासिक तथ्य साझा किए विवि का मकबरा का निर्माण मुगल सम्राट औरंगजेब की पत्नी रबिया-उल-दौरानी उर्फ दिलरास बानो की स्मृति में उनके पुत्र शहजादा आजम शाह द्वारा कराया गया था।

मुख्य इमारत संग मीनारों में भी पड़ रहे धब्बे

इसका निर्माण कार्य 1651 से 1661 के बीच लगभग दस वर्षों में पूरा हुआ। इसे 'मिनी ताजमहल' कहा जाता है। हालांकि इसकी वास्तुकला और पहचान ताजमहल से अलग और विशिष्ट है। मकबरे में प्रवेश दक्षिण दिशा में स्थित लकड़ी के विशाल द्वार से किया जाता है। परिसर के मध्य अष्टकोणीय संगमरमर आधरण में रबिया-उल-दौरानी की मजार स्थित है। पूर्व, पश्चिम और उत्तर दिशा में बनी बारादरी और स्तंभयुक्त मंडपी में की गई ईंटों की कारीगरी भी आकर्षण का केंद्र है। मकबरे के पश्चिम दिशा में स्थित मस्जिद के बारे में जानकारी देते हुए डॉ.कुरैशी ने बताया कि इसका निर्माण हैदराबाद के निजाम ने कराया था।

संरक्षण के ठोस उपाय करने की मांग

कहा जाता है कि निजाम इस मकबरे से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे स्थानातरित करने का प्रयास किया। उस दौरान हुई तोड़फोड़ के निशान आज भी देखे जा सकते हैं।

बाद में कथित रूप से विवित्र स्यान आने के कारण मकबरे को यवास्थान छोड़ा गया और मस्जिद का निर्माण किया गया, जिससे मकबरे के आधार पर भी असर पड़ा हेरिटेज वॉक में एडवोकेट स्थाप्नील जोशी, संकेत कुलकर्णी, आदित्य वाघमारे, आर्किटेक्ट आदित्य देशपांडे, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया की डिप्टी डायरेक्टर रुबीना अब्रार, उद्यमी नरेंद्र कुलकर्णी, आदित्य देशमुख, आजाद खान, नीता गंगावणे, डॉ. संजय पाईकराद, प्राणांत अवसरमल, आदित्य चिलदे, अक्षत त्रिभुवन, किरण वणगुजर, अरविद शाह, रोहन काले, उमेश डोंगरे, एड. निरंजन देशाडे, सुरेश जोशी, नीलिमा जोग, प्रवीण गायकवाड सहित विद्यार्थी और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। नागरिकों ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण के ठोस उपाय किए जाए।

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