

Bacchu Kadu Meets Abhijeet Dipke: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों हर दिन एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। हाल ही में शिंदे सेना में जॉइन करने वाले और विवादों व चर्चाओं में रहने वाले नेता बच्चू कडू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा का कारण कोई राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि उनकी एक सदिच्छा भेंट है, जिसने सत्ताधारी गठबंधन के भीतर की दरारों को उजागर कर दिया है।
बच्चू कडू ने हाल ही में छत्रपति संभाजीनगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले युवा नेता अभिजीत दीपके के घर जाकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की। कडू ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दीपके के संघर्ष की जमकर सराहना की। उन्होंने लिखा कि छात्रों को न्याय दिलाने के लिए अभिजीत दीपके द्वारा खड़ा किया गया आंदोलन न्याय की लड़ाई का एक प्रभावी उदाहरण है। उन्होंने दीपके के सातत्यपूर्ण संघर्ष को सलाम करते हुए उन्हें छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला सच्चा योद्धा बताया।
बच्चू कडू का यह कदम भाजपा समर्थकों को बिल्कुल रास नहीं आया। जैसे ही कडू ने इस मुलाकात की जानकारी साझा की, सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों ने उन्हें निशाने पर ले लिया। भाजपा समर्थकों की प्रतिक्रिया बेहद तीखी और व्यक्तिगत थी। एक समर्थक ने टिप्पणी करते हुए लिखा, बच्चू कडू और कहां-कहां अपना मुंह काला कराने जाएंगे? इतना ही नहीं, समर्थकों ने उनके नाम का मजाक उड़ाते हुए उन्हें घोचू तक कह डाला और तर्क दिया कि बच्चू और घोचू सुनने में एक जैसे यमक लगते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि बच्चू कडू अभी हाल ही में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ आए हैं। हालांकि, उनके इस ताजा कदम ने गठबंधन के भीतर एक अजीब स्थिति पैदा कर दी है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि जहां एक तरफ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डॉक्टर श्रीकांत शिंदे CJP के आंदोलनों के विरोध में खड़े रहते हैं, वहीं गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद बच्चू कडू उसी आंदोलन के चेहरे से मिल रहे हैं।
भाजपा समर्थकों ने उन पर तंज कसते हुए कहा कि चार दिन पहले शिवसेना में आए बच्चू अभी भी बच्चू ही हैं। आलोचकों का मानना है कि इस तरह की राजनीति से उनके राजनीतिक सपने कभी पूरे नहीं होंगे।
इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या बच्चू कडू शिंदे सरकार में शामिल होने के बावजूद अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखना चाहते हैं? या फिर यह भाजपा को उनकी ताकत का एहसास कराने का एक तरीका है? भाजपा समर्थकों के मुंह काला करने वाले बयान और कडू के विद्रोही तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान और बढ़ सकती है। फिलहाल, बच्चू कडू की इस सदिच्छा भेंट ने संभाजीनगर से लेकर मुंबई तक के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है।