

Chhatrapati Sambhajinagar Niramay Campaign Maharashtra: मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष के माध्यम से संचालित निरामय छत्रपति संभाजीनगर अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष के राज्यस्तरीय चिकित्सा समन्वयक डॉ. स्वानंद सोनार ने शुक्रवार को छत्रपति संभाजीनगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर चर्चा की।
साथ ही अस्पतालों का निरीक्षण कर मरीजों से संवाद भी किया।डॉ. सोनार ने विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत, अतिरिक्त जिलाधिकारी संभाजीराव अडकूणे तथा निवासी उपजिलाधिकारी जनार्दन विधाते के साथ "निरामय छत्रपति संभाजीनगर" परियोजना की समीक्षा की। बैठक में पिछले 14 महीनों के दौरान जिला मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष द्वारा चलाए गए स्वास्थ्य उपक्रमों का विस्तृत आकलन किया गया।
इस अवसर पर चिकित्सा अधिकारी डॉ. बालाजी गोरे, समाजसेवा अधीक्षक शामसुंदर वाकले तथा चिकित्सा समन्वयक गजानन कांबले भी उपस्थित थे। डॉ. सोनार ने कहा कि यदि जिले की सामाजिक संस्थाएं, निजी अस्पताल और औद्योगिक कंपनियां मिलकर काम करें तो स्वास्थ्य सेवाओं को गरीब और जरूरतमंद लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शहरों तक स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित रखना नहीं।
दौरे के दौरान डॉ. स्वानंद सोनार ने छत्रपति संभाजीनगर शहर के कर्नावट हॉस्पिटल तथा श्री भगवान महावीर हॉस्पिटल का अचानक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पतालों में भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर उपचार व्यवस्था, दवाइयों की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में जिले में तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर, गर्भाशय मुख कैंसर, सिकल सेल तथा एनीमिया जैसी बीमारियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इन बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए विशेष स्वास्थ्य परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं।
झुग्गी बस्तियों, आदिवासी क्षेत्रों, तांडा बस्तियों, असंगठित मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। डॉ. सोनार ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारियों का प्रारंभिक चरण में पता चलना बेहद जरूरी है। इसके लिए घर-घर जाकर जांच और स्क्रीनिंग अभियान चलाना आवश्यक है ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और गंभीर स्थिति से बचाया जा सके।