PM मोदी दिखाएं अपनी डिग्री, मैं दिखाऊंगा स्कॉलरशिप के कागज, पिता पर लगे आरोपों पर अभिजीत दीपके ने तोड़ी चुप्पी

Abhijit Dipke Scholarship Row: अभिजीत दीपके ने पिता पर लगे आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने पीएम की डिग्री पर सवाल उठाते हुए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के कागज दिखाने की चुनौती दी।
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अभिजीत दीपके और नरेंद्र मोदी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Abhijit Dipke Challenges PM Modi: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके इन दिनों अपनी शिक्षा और पारिवारिक संपत्ति को लेकर उपजे विवादों के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके पिता, भगवानराव दीपके, के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत दर्ज कराई गई है, जिस पर अब अभिजीत ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री पर सवाल खड़ा कर दिया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब आरटीआई और सोशल एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार और जांच एजेंसियों को एक शिकायत सौंपी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके, जो महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम में एक जूनियर इंजीनियर थे, ने अपनी सीमित आय के बावजूद अपने बेटे को अमेरिका की महंगी बॉस्टन यूनिवर्सिटी में कैसे पढ़ाया? शिकायतकर्ता का तर्क है कि एक JE की मासिक सैलरी लगभग 60 से 65 हजार रुपये होती है, जबकि अमेरिका में शिक्षा का खर्च 30 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक आता है। अमित तिवारी ने इसे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मामला बताते हुए गहन जांच की मांग की है।

अभिजीत दीपके का तीखा जवाब

इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने शिकायतकर्ता को भाजपा का एजेंट करार देते हुए कहा कि यह सब उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने की एक राजनीतिक साजिश है।

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दीपके ने एक खुला चैलेंज देते हुए कहा, मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन का लेटर दिखाने के लिए तैयार हूं। क्या आपके नेता पीएम मोदी अपनी असली डिग्री दिखाएंगे? उन्होंने आगे सवाल उठाया कि आखिर सत्ता पक्ष के लोगों को शिक्षा से इतनी समस्या क्यों है? उनका कहना है कि अगर एक साधारण परिवार का लड़का बॉस्टन यूनिवर्सिटी जाकर पढ़कर आ गया, तो इससे किसी को तकलीफ क्यों होनी चाहिए?

शिक्षा और फंडिंग पर सफाई

अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनकी बॉस्टन यूनिवर्सिटी की मास्टर इन पब्लिक रिलेशंस की पढ़ाई स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के माध्यम से पूरी हुई है। उन्होंने हैरानी जताई कि एक सामान्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति की शिक्षा को इस तरह के संदेह के दायरे में क्यों लाया जा रहा है।

यह विवाद केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता अमित तिवारी ने सीजेपी संगठन के फंड और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के योगदान पर भी सवाल उठाए हैं, जिसे लेकर उन्होंने सीबीआई और चुनाव आयोग में शिकायत की है। फिलहाल यह पूरा मामला अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले चुका है और इसकी गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है, जहां भविष्य में इस पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है।

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