दिल्ली होटल अग्निकांड के बाद जागा संभाजीनगर मनपा प्रशासन; 2 दिनों में 27 मॉल, होटल और अस्पतालों को नोटिस

Sambhajinagar Fire Safety: दिल्ली होटल अग्निकांड के बाद संभाजीनगर मनपा ने फायर सेफ्टी जांच अभियान शुरू किया है। 2 दिनों में 27 प्रतिष्ठानों को फायर NOC व सुरक्षा नियमों में खामियों पर नोटिस जारी किए।
Sambhajinagar Municipal Corporation administration wakes up following the Delhi hotel fire; notices issued to 27 malls, hotels, and hospitals in two days.
अग्नि सुरक्षा, फायर एनओसी, संभाजीनगर मनपा,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर दिल्ली स्थित होटल में लगी भीषण आग की घटना के बाद मनपा आयुक्त अमोल येड़गे के निर्देश पर दमकल विभाग ने शहर के होटल, रेस्टोरेंट, बार, लॉजिंग, मॉल, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन की विशेष जांच शुरू की है। इस अभियान के तहत शुक्रवार को 4 व शनिवार को 23 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी व अग्नि सुरक्षा नियमों से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं।

मुख्य दमकल अधिकारी अशोक खांडेकर ने बताया कि, शहर की सभी सार्वजनिक व व्यावसायिक इमारतों की चरणबद्ध तरीके से जांच की जा रही है। जहां भी अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन या सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी पाई जाएगी, वहां संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान फायर एनओसी, अग्निशमन उपकरणों व सुरक्षा संबंधी आवश्यक दस्तावेजों में खामियां मिलने पर 2 दिनों में 27 संपत्ति धारकों को नोटिस जारी किए गए हैं। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज कर सभी पात्र इमारतों का निरीक्षण किया जाएगा।

अस्पताल भी जांच के दायरे में

मनपा के नियमों के अनुसार शहर के स्टार होटल, लॉजिंग, बार, रेस्टोरेंट, स्कूल, कॉलेज, कोचिंग क्लासेस, अस्पताल, मॉल, सिनेमा 'हॉल व बड़े व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए दमकल विभाग का अनापत्ति प्रमाण-पत्र अर्थात एनओसी प्राप्त करना व आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरणों को कार्यरत रखना अनिवार्य है। कई स्थानों पर इन नियमों की अनदेखी की शिकायतों को देखकर सभी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था का सत्यापन करने का निर्णय लिया गया है।

साल में 2 बार फायर ऑडिट अनिवार्य

महाराष्ट्र अग्नि प्रतिबंधक व जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम 2006 के तहत पात्र इमारतों के लिए वर्ष में 2 मर्तबा फायर ऑडिट कराना अनिवार्य है, ताकि अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता व संभावित खतरों का आकलन किया जा सके। जनवरी व जुलाई में अधिकृत संस्था की ओर से यह जांच कर रिपोर्ट मुख्य दमकल अधिकारी को पेश करनी पड़ती है। कई संपत्ति धारकों के इस प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लेने से सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

अक्सर दुर्घटना के बाद ही सामने आती हैं कई खामियां

  • कई व्यावसायिक इमारतों में अग्निशमन उपकरण स्थापित तो हैं, परंतु उनकी नियमित जांच व रखरखाव नहीं किया जाता। कुछ स्थानों
  • पर फायर एनओसी का समय पर नवीनीकरण नहीं कराया जाता।
  • कई जगह फायर ऑडिट भी नहीं कराए जाने की खबरें आती हैं।
  • नतीजतन, किसी दुर्घटना के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियों को देखकर प्रशासन ने पूर्व तैयारी व नियमित निगरानी पर जोर दिया है।
  • मनपा आयुक्त येड़गे ने कहा कि शहर की सभी सार्वजनिक व व्यावसायिक इमारतों को अग्नि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
  • अग्नि सुरक्षा के मामले में किसी भी किस्म की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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