

Amravati Women Hospital Fire Safety Audit Pending: अमरावती जिला स्त्री अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार की ओर से लोक निर्माण विभाग के विजली विभाग को भेजे गए पत्र से सामने आया है कि फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए जरूरी फॉर्म-बी अब तक जमा नहीं किया गया है।
अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन फायर ऑडिट में हो रही देरी ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैंअस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज, नवजात और उनके परिजन मौजूद रहते हैं। ऐसे में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निसुरक्षा उपकरणों और व्यवस्था की नियमित जांच बेहद जरूरी है। इसके बावजूद फायर ऑडिट की प्रक्रिया 37 दिनों तक लंबित रहने से संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
फायर ऑडिट की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने 17 जुलाई को लोक निर्माण विभाग के विजली विभाग से जुड़े ठेकेदार को पत्र भेजा था। इसमें अग्निशमन NOC के नवीनीकरण के लिए आवश्यक फॉर्म-बी जमा करने को कहा गया था।
पत्र में भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति को टालने के लिए अग्निसुरक्षा से संबंधित प्रक्रिया समय पर पूरी करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया था। हालांकि, संबंधित स्तर पर इस पत्र को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया और निर्धारित समय में फॉर्म जमा नहीं किया गया।
अमरावती जिला स्त्री अस्पताल में करीब तीन वर्ष पहले आग लगने की घटना भी सामने आ चुकी है। ऐसे में वर्तमान में फायर ऑडिट लंबित रहने का मामला और गंभीर माना जा रहा है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आग से बचाव की व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही मरीजों और कर्मचारियों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
अब सवाल उठ रहा है कि यदि समय पर फायर ऑडिट किया जाता तो क्या संभावित खतरों की पहचान कर उन्हें पहले ही दूर किया जा सकता था। साथ ही फायर ऑडिट में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग भी उठ रही है।
मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था की तत्काल प्रत्यक्ष जांच करने की जरूरत है। फायर ऑडिट की प्रक्रिया पूरी करने के साथ सभी अग्निशमन उपकरणों, अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकासी मार्ग और अन्य सुरक्षा इंतजामों की स्थिति की भी जांच की जानी चाहिए।
अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभागों से फायर ऑडिट में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।