PIL से लेकर टैक्स मामलों तक, नागपुर हाईकोर्ट का नया रोस्टर जारी; 8 जून से बदलेगी सुनवाई व्यवस्था

Nagpur Criminal Cases: बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 8 जून 2026 से लागू नई रोस्टर व्यवस्था जारी की है। इसके तहत विभिन्न बेंचों को जनहित, सेवा, कर और आपराधिक मामलों की सुनवाई सौंपी गई है।
From PILs to Tax Matters: Nagpur High Court Releases New Roster; Hearing Arrangements to Change from June 8
नागपुर खंडपीठ, बंबई उच्च न्यायालय,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Bench Bombay High Court: नागपुर बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने मुकदमों की सुनवाई के लिए 8 जून 2026 से लागू होने वाली अपनी नई 'सिटिंग लिस्ट' (रोस्टर) जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत जनहित याचिकाओं, आपराधिक मामलों, कर (टैक्स) और सेवा संबंधी मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विभिन्न डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच का नया निर्धारण किया गया है।

न्या. अनिल किलोर और न्या. राज वाकोडे की कमर्शियल अपीलेट डिवीजन बेंच सभी जनहित याचिकाओं (PIL), टेंडर से जुड़े विवादों, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, MAT/CAT के आदेशों के खिलाफ याचिकाओं और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कर तथा सीमा शुल्क से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।

न्या. पानसरे की द्वय बेंच में जिप और मनपा से जुड़े मामले न्या. अनिल पानसरे और न्या. रजनीश व्यास की पीठ मुख्य रूप से जिला परिषद और नागपुर महानगरपालिका जैसे स्थानीय प्राधिकरणों के सेवा मामलों, अवमानना अपीलों और लेटर पेटेंट अपीलों (LPA) पर सुनवाई करेगी। न्या. उर्मिला जोशी-फाल्के और न्या. निवेदिता मेहता की खंडपीठ जाति प्रमाणपत्र जांच समिति से जुड़ी रिट याचिकाओं, आपराधिक याचिकाओं और पारिवारिक न्यायालय की अपीलों को देखेगी। न्या. वाईजी खोबरागड़े और न्या. सुशील घोडेस्वर की बेंच अन्य सेवा मामलों की रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

एकल पीठों की मुख्य जिम्मेदारियां

न्या. एमडब्ल्यू चंदवानी की बेंच में FIR, चार्जशीट और संज्ञान लेने वाले आदेशों को रद्द करने से संबंधित आपराधिक याचिकाओं और Cr.P.C। की धारा 482 / B.N.S.S. की धारा 528 के तहत आवेदनों की सुनवाई करेगी। न्या. रोहित जोशी के समक्ष 2022 और उसके बाद की दीवानी रिट याचिकाओं के अलावा कंपनी अधिनियम (1956 व 2013), बैंकिंग विनियमन अधिनियम और मध्यस्थता से जुड़े विशेष मामलों की सुनवाई होगी। न्या, प्रवीण पाटिल की बेच 2020 के बाद की मोटर दुर्घटना दावा (MACP) अपीलों और अग्रिम जमानत के आवेदनों पर फैसला करेगी, न्या, एमएम नेलीकर की बेंच में नियमित जमानत, आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं और उन मामलों की सुनवाई का जिम्मा सौंपा गया है जहां आरोपी जमानत पर बाहर है।

इन मामलों को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता

अदालत के निर्देशानुसार, जिन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित या समयबद्ध सुनवाई का आदेश दिया है, उन्हें सबसे पहले सुना जाएगा। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों, समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों के मामलों और ऐसे आपराधिक अपीलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी जिनमें आरोपी जेल में बंद हैं।

नए रोस्टर के लागू होने के साथ, जिन मामलों पर आंशिक सुनवाई हो चुकी है, उन्हें नए रोस्टर के अनुसार संबंधित अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। हालांकि यदि मामले से जुड़े सभी पक्ष लिखित रूप में यह संयुक्त अनुरोध करते हैं कि मामला उसी न्यायाधीश के पास रहे जिसने पहले इसे सुना था तो वरिष्ठतम न्यायाधीश की मंजूरी के बाद उसे उसी अदालत में रखा जा सकता है।

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