Amravati News: भारत के मानचित्र पर महानुभाव पंथ की काशी और भगवान श्री गोविंद प्रभु की जन्मस्थली के रूप में विख्यात रिद्धपुर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा इस पावन नगरी को मॉडल पर्यटन स्थल बनाने का जो सपना दिखाया गया था, वह स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. आलम यह है कि करोड़ों की निधि खर्च होने के बाद भी पूरा गांव गंदगी, ओवरफ्लो नालियों और संक्रमण की चपेट में है.फोटो गंदगीसरकार ने रिद्धपुर के विकास के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध कराए, जिससे मुख्य मार्गों का कांक्रीटीकरण हुआ और बड़ी नालियां बनीं. लेकिन आज यही नालियां मौत का जाल बन चुकी हैं. पिछले दो वर्षों से मुख्य नालियां पूरी तरह चोक हैं.
नालियों के ऊपर प्लास्टिक की थैलियां, बिसलेरी की बोतलें और कचरा तैर रहा है. गांव से सटी नालियां इतनी भर चुकी हैं कि उन्हें पहचानना मुश्किल है. यदि कोई राहगीर इनमें गिर जाए, तो जान बचाना मुश्किल हो सकता है.पाइपलाइन में लीकेजगांव की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. पिछले दो सप्ताह से मुख्य पाइपलाइन फटी होने के कारण जलापूर्ति ठप है. जलापूर्ति की पाइपलाइनें गंदी नालियों के बीच से होकर गुजरती हैं.
जगह-जगह लीकेज होने के कारण गंदा पानी घरों तक पहुँच रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी महामारियां पैर पसार रही हैं. गांव में स्थित तीन विशाल टंकियों में से एक पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. इसके पास ही जिला परिषद स्कूल है, जिससे मासूम बच्चों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है.प्रशासनिक शून्य और राजनीतिक खींचतानरिद्धपुर ग्राम पंचायत पिछले 20 वर्षों से बदहाली का शिकार है.
हाल ही में 6 महीने पहले सरपंच दरख्शांनाज को अपात्र घोषित कर दिया गया, जिसके बाद से कामकाज ग्राम सेवक और उपसरपंच के भरोसे है. अब 28 अप्रैल को नए सरपंच का चुनाव होना है, लेकिन वर्तमान में कोई सुध लेने वाला नहीं है.बड़े आंदोलन की तैयारी में ग्रामीणगांव में देश का पहला मराठी भाषा विश्वविद्यालय, रेलवे स्टेशन और पुलिस चौकी जैसी आधुनिक सुविधाएं तो आ गई हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे के अभाव ने विकास पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी दूध पीती बिल्ली की भूमिका निभा रहे हैं और सब कुछ देखकर भी अनजान बने हुए हैं.
आंदोलन की चेतावनीग्रामीणों ने नालियों की तत्काल सफाई कर ब्लीचिंग और कीटनाशक का छिड़काव करने, फटी हुई जलापूर्ति पाइपलाइन को तुरंत बदलने, जर्जर पानी की टंकी और ग्राम पंचायत की पुरानी इमारत को हटाकर नई व्यवस्था करने की मांग की गई. यदि जल्द सफाई और जल संकट का समाधान नहीं हुआ तो तीव्र आंदोलन की चेतावनी नागरिकों ने दी है.बाक्सग्रापं की इमारत पशुओं का कैद खानाग्राम पंचायत की इमारत जो देखने पर पशुओं का कैद खाना दिखाई देता है. जिसमें नीम के वृक्ष भी छत फाड़कर कर बाहर निकल गए हैं.