चांदूर बाजार में टोल टैक्स के विरोध में आंदोलन, लिखित आश्वासन तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी

NH 353 Toll: चांदूर बाजार शहर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-353 पर प्रस्तावित हैदतपुरवडाला टोल प्लाजा के विरोध में सर्वपक्षीय संघर्ष समिति ने आंदोलन शुरू किया।
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चांदूर बाजार टोल नाका (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chandur Bazar Toll Plaza Protest: अमरावती जिले के चांदूर बाजार शहर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे क्रमांक 353 का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके बाद ग्राम हैदतपुरवडाला के पास टोल प्लाजा का निर्माण कर इसे कुछ ही दिनों में शुरू करने की तैयारी थी।

जैसे ही इसकी भनक राजनीतिक दलों को लगी, भाजपा ने इसके खिलाफ ज्ञापन सौंपा। इसके बाद शनिवार को सर्वपक्षीय टोलमुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सभी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने टोल प्लाजा के पास शांतिपूर्ण ठिया आंदोलन और अनशन शुरू कर दिया। फोटो टोल नाका8 दिनों में निर्णय का आश्वासनआंदोलन की सूचना मिलते ही तहसीलदार गाडे और थाना प्रभारी ठाणेदार सोनोने तुरंत मौके पर पहुंचे।

हैदतपुरवडाला टोल नाका शुरू करने की तैयारी पर विरोध

उन्होंने आंदोलनकारियों की मांगों को संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि फिलहाल यह टोल टैक्स शुरू नहीं किया जाएगा और अगले 8 दिनों के भीतर टोल मुक्ति के संदर्भ में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद अनशनकारियों ने अपना अनशन समाप्त किया। सर्वपक्षीय आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने मुख्य मांगें रखीं, जिनमें स्कूली छात्रछात्राओं को ले जाने वाली बसों तथा स्थानीय किसानों के वाहनों को पूरी तरह से टोल टैक्स मुक्त करने की मांग शामिल है।

स्थानीय नागरिकों ने जताया रोष

आंदोलन में प्रदीप बंड, किशोर देशमुख, गौरव किटुकले, राजू भाऊ तंतरपाले, डॉ। तुषार देशमुख, निलेश पलसपगार, सचिन हीवराले, योगेश इसल, गोपाल रडके, प्रीतम मानपुरे, साजन मोहोड, श्रेयस बर्वे, संविधान मोहोड, ऋषिकेश अवसरमोल, रोहन पापळकर, गौतम खंडारे, गजानन देशमुख, करण खंडारे, लखन अर्डक, स्वप्निल नवलकर, राहुल ठाकरे सहित बड़ी संख्या में किसान और विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता शामिल हुए।

आंदोलनकारियों ने उठाई स्थायी टोल मुक्ति की मांग

लोकविकास संगठन के अध्यक्ष गोपाल मधुकराव भालेराव ने कहा कि हैदतपुरवडाला टोल नाका स्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो टोल नाके के 25 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्थानीय नागरिकों को टोल मुक्ति का लाभ मिलना चाहिए। इस प्राथमिक मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। आज आंदोलनकारियों को मिला आश्वासन महज मौखिक है। लिखित आश्वासन के बिना आंदोलन स्थगित करना आम जनता को गुमराह करने जैसा है। जब तक हमें लिखित आश्वासन नहीं मिलता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

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