गणेश पंडाल में नवनीत राणा का अनोखा अंदाज...जमकर बजाया ढोल, देखें VIDEO

Navneet Rana Dhol Video: महाराष्ट्र के अमरावती में गणेशोत्सव के मौके पर अमरावती की पूर्व सांसद और भाजपा नेता नवनीत राणा का अलग ही अंदाज सामने आया।
Navneet Rana Video
नवनीत राणा (Image- Screen Capture)
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Navneet Rana Viral Video: अमरावती में गणेशोत्सव के दौरान एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व सांसद और बीजेपी नेत्री नवनीत राणा अपने खास अंदाज में नजर आईं। वे अमरावती के नवसारी स्थित जवाहर नगर के अष्टविनायक गणेश पंडाल में दर्शन के लिए पहुंची थीं। उस वक्त पंडाल में पूजा-पाठ और आरती चल रही थी। ढोल-ताशों की गूंज, जयकारों की आवाज़ और भक्तिमय माहौल ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया।

नवनीत राणा खुद को रोक नहीं पाईं और सीधे ढोल पथक के साथ शामिल हो गईं। उन्होंने ढोल की थाप पर ताल और सुर मिलाते हुए पूरे उत्साह के साथ ढोल बजाया। उनका यह अंदाज देख पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भी खुशी से झूम उठे। कार्यकर्ताओं ने भी तालियों और जयकारों से उनका साथ दिया।

यहां देखें VIDEO

नवनीत राणा का अनोखा अंदाज वायरल

ढोल बजाती हुई नवनीत राणा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है, जिसमें आम नागरिकों से लेकर नेता और कलाकार भी बड़ी श्रद्धा से हिस्सा लेते हैं। ऐसे पर्वों पर नेताओं का जनता के बीच जाना आम बात है, लेकिन नवनीत राणा का ढोल बजाने वाला यह अनोखा अंदाज लोगों को खासा पसंद आ रहा है।

लोगों ने की तारीफ

सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो को खूब सराह रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि नेताओं को जनता से इसी तरह जुड़ना चाहिए। वहीं, स्थानीय श्रद्धालुओं ने कहा कि नवनीत राणा का यह अंदाज उन्हें अपनापन और आत्मीयता का एहसास कराता है। गणेशोत्सव के इस पावन अवसर पर नवनीत राणा ने सिर्फ गणराय के दर्शन ही नहीं किए, बल्कि ढोल बजाकर अमरावती के लोगों का दिल भी जीत लिया।

गणेश उत्सव की धूम पूरे देश में है, लेकिन इस पर्व को पर्यावरण के अनुकूल मनाने की मुहिम भी जोर पकड़ रही है। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने गणेश भक्तों से अपील की है कि वे अपनी गणेश मूर्तियों का विसर्जन नदियों, तालाबों और कुओं में करने के बजाय घर पर ही करें। समिति का मानना है कि पारंपरिक रूप से हमारे त्यौहार प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर मनाए जाते थे, लेकिन समय के साथ आए बदलावों ने इन्हें पर्यावरण के लिए हानिकारक बना दिया है। इस अपील का मुख्य उद्देश्य जल प्रदूषण को रोकना और जलीय जीवन की रक्षा करना है।

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