अमरावती में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन बुआई अब तक सिर्फ 23 प्रतिशत; किसानों को भारी बारिश का इंतजार

Amravati Monsoon: अमरावती में सामान्य के 96.2% बारिश दर्ज हुई है, लेकिन अब तक केवल 23.54% खरीफ बुआई हो सकी है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
Monsoon gathers pace in Amravati, yet sowing stands at only 23 percent; farmers await heavy rainfall.
अमरावती, मानसून, प्रतीकात्मक तस्वीर (साेर्स: एआई फोटो)
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Amravati Monsoon Kharif Sowing Rainfall: अमरावती जिले में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। अब तक सामान्य वर्षा 145.7 मिमी के मुकाबले 140.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य का 96.2 प्रतिशत है। जिले में प्रस्तावित 6,82,992 हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले अब तक केवल 1,60,766 हेक्टेयर (23.54%) में ही खरीफ फसलों की बुआई हो सकी है।

कई क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अभी भी अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। कम बारिश में की गई बुआई पर दोबारा बुआई का खतरा बना हुआ है। कृषि विभाग की नजर अब अगले कुछ दिनों की बारिश पर टिकी है, क्योंकि उसी पर खरीफ सीजन की गति और सफलता निर्भर करेगी।

तिवसा में सामान्य से कम बारिश

तहसीलवार आंकड़ों में चांदूर बाजार सबसे आगे रहा, जहां सामान्य के मुकाबले 144 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई, इसके बाद अंजनगांव (129.6%), नांदगांव खंडेश्वर (126.5%), मोर्शी (124.7%) और दर्यापुर (123.4%) का स्थान रहा। वहीं कम वर्षा वाले तहसीलों में भातकुली में सबसे कम 61.9 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा अचलपुर (70.6%), चिखलदरा (70.9%) और धामणगांव (68.9%) में भी सामान्य से कम बारिश हुई है।

तिवसा तहसील में सामान्य 124.8 मिमी के मुकाबले 103.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य का 82.7 प्रतिशत है। वहीं वरुड तहसील में 133.1 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले 132.9 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य का 99.8 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार वरुड में अब तक लगभग सामान्य वर्षा दर्ज हुई है, जबकि तिवसा में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई।

किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे

हालांकि जिले में 3 जुलाई तक सामान्य के 96.2 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है, लेकिन कई क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान अभी भी अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में संतोषजनक वर्षा नहीं हुई, तो कम बारिश में की गई बुवाई पर दोबारा बुआई (री-सोइंग) का संकट खड़ा हो सकता है।

जिले में कपास की सबसे अधिक बुआई

जिले में खरीफ फसलों की बुआई की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित है, लेकिन पर्याप्त और लगातार बारिश नहीं होने से अब तक केवल 23.54 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है।

कृषि विभाग के अनुसार प्रस्तावित 6.82।992 हेक्टेयर क्षेत्र में से 1,60,766 हेक्टेयर में ही बुवाई पूरी हुई है। फसलवार बुआई में कपास 62,189.4 हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है, जबकि सोयाबीन 52,965 हेक्टेयर, तुअर 32,236.4 हेक्टेयर, मक्का 11,444.2 हेक्टेयर और धान 1,518.2 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है।

कौन सी फसल की कितनी बुआई

फसल बुआई क्षेत्र (हेक्टेयर)
कपास 62,189.4
सोयाबीन 52,965.0
तुअर 32,236.7
मक्का 11,444.2
धान 1,518.2
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