अकोला के बालापुर नगर परिषद में बड़ा सियासी भूचाल! BJP गटनेता सहित दो पार्षदों के ओबीसी जाति प्रमाण पत्र खारिज

Akola OBC Caste: अकोला की जाति सत्यापन समिति ने बालापुर नगर परिषद के दो OBC आरक्षित सीटों से निर्वाचित पार्षदों के जाति वैधता दावे खारिज कर दिए। फैसले से स्थानीय राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।
Major political upheaval in Akola's Balapur Municipal Council! OBC caste certificates of two councilors, including the BJP group leader, cancelled.
ओबीसी जाति प्रमाणपत्र खारिज,(सोर्स-सोशल मीडिया)
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Akola OBC Caste Validity Rejected: अकोला जिले की बालापुर नगर परिषद की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नगर परिषद चुनाव-2025 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों से निर्वाचित दो पार्षदों के जाति वैधता दावों को जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति, अकोला ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद नगर परिषद की राजनीतिक तस्वीर बदलने की संभावना जताई जा रही है।

समिति ने भाजपा के नगर परिषद गटनेता तथा भाजपा शहर एवं तहसील अध्यक्ष अब्दुल गुफरान (उर्फ सज्जाद) अब्दुल गफ्फार और नगर विकास पार्टी–वंचित बहुजन आघाड़ी की पार्षद निखत नाज अब्दुल रफीक के ओबीसी जाति प्रमाणपत्रों को अवैध घोषित करते हुए उनके जाति वैधता दावे निरस्त कर दिए।

आपत्तियों के बाद हुई विस्तृत सुनवाई

यह निर्णय आक्षेपकर्ता एडवोकेट अनीस मस्तान शाह और एडवोकेट मोहम्मद ऐनोद्दीन परवेज अरमानी द्वारा दायर आपत्तियों एवं प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों, अभिलेखों और कानूनी तर्कों पर सुनवाई के बाद लिया गया।

दोनों पार्षद क्रमशः प्रभाग क्रमांक 8-ए और प्रभाग क्रमांक 7-ए से ओबीसी आरक्षित सीटों पर निर्वाचित हुए थे।

'जुलाहा' समाज का प्रमाणपत्र किया था प्रस्तुत

सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि भाजपा गटनेता अब्दुल गुफरान ने नामांकन पत्र के साथ स्वयं को 'जुलाहा' (ओबीसी) समाज का बताते हुए जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था।

हालांकि, सत्यापन समिति के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित उम्मीदवार वास्तव में ओबीसी वर्ग से नहीं, बल्कि सामान्य मुस्लिम वर्ग से संबंधित हैं।

फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की आशंका

समिति ने अपने आदेश में माना कि कथित रूप से भ्रामक एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया और उसी का उपयोग ओबीसी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए किया गया। इसी आधार पर समिति ने दोनों पार्षदों के जाति वैधता दावों को अस्वीकार कर दिया।

निखत नाज का जाति प्रमाणपत्र भी रद्द

समिति ने अपने अंतिम आदेश में पार्षद निखत नाज अब्दुल रफीक के जाति दावे को भी अवैध घोषित करते हुए उपविभागीय अधिकारी, बालापुर द्वारा 26 नवंबर 2021 को जारी मोमीन (ओबीसी) जाति प्रमाणपत्र को रद्द करने के निर्देश दिए।

राजनीतिक असर की संभावना

दो निर्वाचित पार्षदों के जाति दावे खारिज होने के बाद बालापुर नगर परिषद के सत्ता समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। यदि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी यह निर्णय बरकरार रहता है, तो संबंधित सीटों की सदस्यता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। राजनीतिक दलों की नजर अब आगामी कानूनी कार्रवाई और प्रशासन के अगले कदमों पर टिकी हुई है।

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