

Highlights:
मेलघाट टाइगर रिजर्व और वन विभाग के विभिन्न प्रभागों में सैकड़ों रोजंदारी मजदूरों का पांच से छह महीने का वेतन बकाया है।
मजदूर वन्यजीवों की सुरक्षा, फायर लाइन, नर्सरी रखरखाव और वन क्षेत्र की मरम्मत जैसे काम करते हैं।
वेतन नहीं मिलने से राशन, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।
Melghat Tiger Reserve: मेलघाट टाइगर रिजर्व और वन विभाग के विभिन्न प्रभागों में दिन-रात पसीना बहाने वाले सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी (रोजंदारी) मजदूरों का पिछले पांच से छह महीनों से वेतन बकाया है। चिखलदरा स्थित वन प्रशिक्षण संस्थान सहित टाइगर रिजर्व के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों को वेतन न मिलने के कारण उन पर भुखमरी की नौबत आ गई है।
मेलघाट के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा, आग बुझाना (फायर लाइन), नर्सरी का रखरखाव, सड़क व बाड़ की मरम्मत तथा वन प्रशिक्षण संस्थान की नियमित देखरेख जैसे कठिन कार्य यह मजदूर पूरी ईमानदारी से करते हैं।
अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने वाले इन मजदूरों को समय पर मजदूरी देना प्रशासन का दायित्व है, लेकिन पिछले छह महीनों से उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। मजदूरी न मिलने से घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च उठाना मजदूरों के लिए असंभव हो गया है।
स्थानीय दुकानों से भी अब उधारी मिलना बंद हो चुका है। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण कैसे करें, यह आक्रोश भरा सवाल मजदूर पूछ रहे हैं। प्रशासन से तत्काल बजट उपलब्ध कराकर बकाया मजदूरी का भुगतान करने की पुरजोर मांग की जा रही है।
चिखलदरा वन प्रशिक्षण संस्थान डीएफओ मुक्ता टेकाडे ने कहा कि वरिष्ठ स्तर पर मजदूरों की मजदूरी के भुगतान हेतु बजट (फंड) की मांग की गई है। निधि प्राप्त होते ही मजदूरों का मानदेय तत्काल दे दिया जाएगा और उनके वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।