

Ashram Shala Food System: अमरावती जिले के मेलघाट केआदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आवासीय आश्रमशालाओं में छात्रों की भोजन व्यवस्था एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हजारों आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी इस प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मेलघाट की आश्रमशालाओं में जुलाई 2026 के दौरान सेंट्रल किचन से आपूर्ति किए गए भोजन के बाद करीब 70 से अधिक छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटना सामने आई थी। टिटंबा, बिजुधावड़ी और सावलीखेड़ा की आश्रमशालाओं में दूषित भोजन के बाद सेंट्रल किचन व्यवस्था को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
टाटा ट्रस्ट और अक्षयपात्र फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई सेंट्रल किचन योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन देना था। हालांकि, खाद्य विषाक्तता की घटनाओं के बाद विभाग फिर से स्कूल स्तर पर भोजन पकाने की पुरानी व्यवस्था की ओर लौट रहा है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या स्कूल स्तर पर खाद्यान्न, सब्जियों, अंडे और फलों की आपूर्ति पर निगरानी रख पाना संभव होगा।
स्थानीय अभिभावकों और नागरिकों द्वारा यह मांग की जा रही है कि केवल कागजी रिकॉर्ड के बजाय जमीनी हकीकत की जांच हो। मुख्य रूप से खाद्यान्न का स्रोत, गुणवत्ता और भंडारण जैसे निम्नलिखित बिंदुओं पर पालकवर्ग व नागरिकों व्दारा सवाल उठाए जा रहे हैं। आश्रमशालाओं में आने वाला चावल, गेहूं, दाल और मसाले कहां से खरीदे जाते हैं। क्या इनकी आपूर्ति सरकारी गोदामों से होती है या निजी आपूर्तिकर्ताओं से। स्कूल में पहुंचने वाले अनाज की गुणवत्ता की जांच कौन करता है। क्या भंडारण चूहों, नमी और अन्य दूषित तत्वों से सुरक्षित है, ऐसे सवाल भी खडे हो रहे हैं।
छात्रों के पोषण के लिए मिलने वाले ताजे अंडे, केले और दूध की मात्रा तथा गुणवत्ता की जांच किस प्रक्रिया के तहत होती है। क्या वास्तविक आपूर्ति और रजिस्टर के आंकड़ों में कोई अंतर है।
केवल आश्रमशाला अधीक्षक या प्रधानाध्यापक की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के आकस्मिक निरीक्षण की मांग जोर पकड़ रही है। शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से रसोईघर, अनाज स्टॉक और भोजन की मात्रा का प्रत्यक्ष निरीक्षण करना चाहिए। साथ ही, क्षेत्रीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों को भी आश्रमशालाओं का औचक दौरा कर छात्रों से सीधे संवाद करना चाहिए। छात्रों का स्वास्थ्य प्रशासन की प्राथमिकता होना चाहिए। सेंट्रल किचन हो या स्कूल स्तर की व्यवस्था, भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता ही अंतिम कसौटी होनी चाहिए।
आश्रमशालाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं सरकार की निगरानी और संरक्षण में आवासीय रूप से शिक्षा प्राप्त करते हैं। उनके भोजन की गुणवत्ता केवल किसी एक स्कूल का प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और भविष्य के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
मेलघाट में सामने आई हालिया घटना के बाद सेंट्रल किचन व्यवस्था पर पुनर्विचार शुरू हुआ है। ऐसे में अब स्कूल स्तर पर शुरू होने वाली भोजन व्यवस्था पर भी उतनी ही कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है। अन्यथा व्यवस्था बदलने के बावजूद समस्याएं बनी रहने की संभावना है।