Amravati: घर-घर पहुंचेंगे BLO, महाराष्ट्र में शुरू होगा मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण अभियान
Voter List Revision: भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र के करीब 9.86 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच के लिए जून से 'विशेष गहन पुनरीक्षण' अभियान की घोषणा की है, जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Maharashtra Voter List Special Intensive Revision 2026: भारत निर्वाचन आयोग ने देश भर में पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूचियां तैयार करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण “विशेष गहन पुनरीक्षण” अभियान की घोषणा की है। इस महाअभियान के तीसरे चरण में महाराष्ट्र राज्य को शामिल किया गया है। इसके तहत राज्य के लगभग 9.86 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
यह व्यापक प्रक्रिया जून 2026 से शुरू होकर अक्टूबर 2026 तक निरंतर चलेगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य तेजी से हुए शहरीकरण और स्थानांतरण के कारण मतदाता सूची में बढ़ गए दोहरे नामों और मृत मतदाताओं के नामों को हटाना तथा नए पात्र नागरिकों का पंजीकरण करना है।
जून से अक्टूबर तक का शेड्यूल
निर्वाचन आयोग द्वारा तय समय-सारणी के अनुसार, 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जबकि दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। इस दौरान 30 जून से 29 जुलाई के बीच बूथ स्तरीय अधिकारी प्रत्येक घर में जाकर पहले से भरे हुए गणना प्रपत्र मतदाताओं को सौंपेंगे।
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इस प्रपत्र में वर्तमान विवरण के साथ-साथ वर्ष 2002-2004 की पुरानी जानकारी भी दर्ज होगी। मतदाताओं को इसे स्वयं भरने या वोटर्स वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सबमिट करने की सुविधा भी मिलेगी। यदि बीएलओ के दौरे के समय कोई घर बंद मिलता है, तो अधिकारी कम से कम तीन बार पुनः उस पते पर भेंट देंगे।
आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं
इस अभियान के दौरान दस्तावेजों की सत्यता को लेकर निर्वाचन आयोग ने एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में शामिल व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं, इसकी शत-प्रतिशत पुष्टि करना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है। यदि किसी वोटर के रिकॉर्ड में कोई विसंगति या मिसमैच पाया जाता है, तो उसे नोटिस देकर आवश्यक दस्तावेज मांगे जाएंगे।
आयोग ने दो टूक स्पष्ट किया है कि ‘आधार’ का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में ही किया जाएगा। आधार अधिनियम 2026 की धारा 9 का हवाला देते हुए साफ किया गया है कि आधार कार्ड को किसी भी स्थिति में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
20 साल बाद गहन पुनरीक्षण
ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में इससे पहले वर्ष 1952 से 2004 के बीच विभिन्न कालखंडों में इस प्रकार का सघन अभियान चलाया गया था। हालांकि, पिछले 20 वर्षों के लंबे अंतराल में केवल “विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण” ही किया गया, कोई गहन भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। इस दो दशक की अवधि में बड़े पैमाने पर लोगों का रोजगार और अन्य कारणों से शहरों में स्थानांतरण हुआ।
कई नागरिकों ने नए स्थानों पर तो अपने नाम जोड़ लिए, लेकिन पुराने निवास स्थान से नाम कटवाना भूल गए। इसी वजह से सूचियों में बड़े पैमाने पर दोहरे नाम दर्ज होने की आशंका है, जिसे इस अभियान से ठीक किया जाएगा। वर्तमान में राज्य के कुल 9,86,44,413 मतदाताओं के सत्यापन का जिम्मा 1,00,253 बीएलओ संभाल रहे हैं, और अब तक 72.04 प्रतिशत पुराने डेटा की मैपिंग पूरी हो चुकी है।
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राजनीतिक दलों ने नियुक्त किए एजेंट
इस पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों की भूमिका भी तय की गई है। दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंट इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक टीमों का सहयोग करेंगे। हालांकि, निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल राज्य में राजनीतिक दलों द्वारा केवल 1,13,558 बीएलए ही नियुक्त किए जा सके हैं।
इसे देखते हुए मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे प्रत्येक मतदान केंद्र पर अपने अधिक से अधिक प्रतिनिधियों (बीएलए) की नियुक्ति तत्काल पूरी करें ताकि पारदर्शी मतदाता सूची का निर्माण सुगम हो सके।
