कौंडण्यपुर से माता रुक्मिणी की 432 साल पुरानी भव्य पालकी यात्रा पंढरपुर के लिए रवाना

Kaundanyapur Palkhi: अमरावती जिले के श्रीक्षेत्र कौंडण्यपुर से माता रुक्मिणी की 432 वर्षों पुरानी भव्य पालकी यात्रा हजारों वारकरियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पंढरपुर के लिए रवाना हुई।
kaundanyapur rukmini palkhi yatra pandharpur 432 year tradition
Rukmini Palkhi (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Updated on

Pandharpur Wari: ताल, मृदंग, वीणा की गूंज और माता रुक्मिणी के जयघोष से पूरी कौडण्यपुर नगरी शुक्रवार को भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गई। विदर्भ की प्राचीन राजधानी और माता रुक्मिणी का मायका माने जाने वाले श्रीक्षेत्र कौडण्यपुर से 432 वर्षों की अटूट परंपरा समेटे माता रुक्मिणी की पालकी हजारों वारकरियों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की उपस्थिति में पंढरपुर के लिए रवाना हुई।

सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। विट्ठलरुक्मिणी मंदिर समिति की ओर से माता की विधिविधान से पूजाअर्चना कर उन्हें साड़ीचोली अर्पित की गई। इसके बाद मायके से बेटी को ससुराल विदा करने की परंपरा के अनुसार, बेहद भावुक माहौल में पालकी को विदाई दी गई। इस भावुक क्षण में कई श्रद्धालुओं की आंखें छलक आईं।

432 वर्षों की परंपरा के साथ निकली रुक्मिणी पालकी

पालकी जैसे ही मंदिर से आगे बढ़ी, गांव के विभिन्न हिस्सों में ग्रामीणों ने इसका जोरदार स्वागत किया। जगह-जगह रंगोलियां सजाई गईं, फूलों की वर्षा की गई और आरती उतारकर माता के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त की गई। ग्रामीणों की ओर से कई स्थानों पर शरबत का वितरण भी किया गया। महिला भजन मंडलियों ने फुगड़ी खेलकर और भक्ति गीतों के माध्यम से पूरे माहौल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। तालमृदंग की थाप और विट्ठलविट्ठल के नामस्मरण से पूरा गांव गूंज उठा।

श्रद्धालुओं ने की पुष्पवर्षा

जब पालकी पाच पाऊली नामक स्थान पर पहुंची, तो अंबा रुक्मिणी महोत्सव समिति, रविराज देशमुख मित्र मंडल और आसपास के क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं द्वारा आतिशबाजी के साथ इसका भव्य स्वागत किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष और अंबा रुक्मिणी महोत्सव समिति के अध्यक्ष रविराज देशमुख एवं सौ। गायत्री ताई देशमुख ने सपरिवार पालकी का पूजन किया। उन्होंने सभी वारकरियों का यथोचित सम्मान भी किया। महाआरती के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने अत्यंत भावुक मन से माता की पालकी को आगे के लिए विदा किया।

ताल-मृदंग और विट्ठल नामस्मरण से गूंजा कौंडण्यपुर

कौडण्यपुर से पंढरपुर तक की यह पालकी यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि विदर्भ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। पिछले 432 वर्षों से लगातार चली आ रही यह परंपरा आज भी हजारों वारकरियों को भक्ति और संस्कारों की प्रेरणा दे रही है। इस पालकी यात्रा को महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित पालकी यात्राओं में गिना जाता है और पंढरपुर में माता रुक्मिणी की इस पालकी का एक विशेष स्थान है।

रवाना हुई रुक्मिणी पालकी

गुरु पूर्णिमा के दिन यह पालकी सीधे विट्ठल भगवान के गर्भगृह में होती है, जहां बड़े ही भक्तिभाव और सम्मान के साथ इसका पूजन किया जाता है। समारोह में अंबा रुक्मिणी महोत्सव समिति के अध्यक्ष व भाजपा जिलाध्यक्ष रविराज देशमुख, संजय महाराज ठाकरे, पंकज महाराज महल्ले, विट्ठलरुक्मिणी मंदिर समिति के अध्यक्ष नामदेवराव अंबालकर, सरपंच प्रेमदास राठौड़, अक्षय पुंडेकर सहित अंबा रुक्मिणी महोत्सव समिति के पदाधिकारी, वारकरी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

Navbharat Live
navbharatlive.com