गणेशोत्सव बनेगा राजनीतिक अखाड़ा, उत्सव के रंग में रंगेगा मनपा चुनाव, वर्चस्व जमाने की मची होड़

आगामी 27 अगस्त से गणेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। इस बार उत्सव का रंग धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक होने वाला है। मनपा चुनाव नजदीक आने के कारण शहर के गणेश मंडलों पर वर्चस्व जमाने की होड़ तेज हो गई है।
आगामी 27 अगस्त से गणेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। इस बार उत्सव का रंग धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक होने वाला है। मनपा चुनाव नजदीक आने के कारण शहर के गणेश मंडलों पर वर्चस्व जमाने की होड़ तेज हो गई है।
अमरावती न्यूज
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Amravati News: आगामी 27 अगस्त से शुरू हो रहे गणेशोत्सव का रंग इस बार धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक होने वाला है। आगामी मनपा चुनाव नजदीक आने के कारण शहर के गणेश मंडलों पर वर्चस्व जमाने की होड़ तेज हो गई है। ये उत्सव केवल आस्था और परंपरा का पर्व न रहकर, नेताओं और इच्छुक उम्मीदवारों के लिए जनसंपर्क का महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है।

शहर के प्रमुख गणेश मंडलों के अध्यक्ष और पदाधिकारी पूर्व महापौर या नगरसेवक रह चुके हैं। ऐसे में मंडलों का नेतृत्व पाना सिर्फ धार्मिक प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि राजनीतिक दबदबे का भी प्रतीक बन गया है। सूत्रों के अनुसार, करीब 2,000 कार्यकर्ताओं की देशभर में यात्राएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि आगामी चुनाव में नेटवर्क मजबूत किया जा सके।

गणेश मंडलों में पदाधिकारियों की नियुक्तियां

लोकसभा और विधानसभा चुनाव जहां नेताओं पर आधारित होते हैं, वहीं महापालिका चुनाव कार्यकर्त्ताओं का अखाड़ा होता है। इसलिए बड़े नेता गणेशोत्सव के दौरान कार्यकर्ता को मंच पर लाकर, उन्हें जनता के बीच पहचान दिलाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। गणेश मंडलों में पदाधिकारी नियुक्तियों में भी राजनीतिक समीकरण देखे जा रहे हैं। यही मंडल आगामी प्रचार अभियानों का आधार बनने जा रहे हैं।

इस बार अमरावती में गणेशोत्सव केवल भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पर्व नहीं, बल्कि आगामी महापालिका चुनाव की पृष्ठभूमि तय करने वाला एक बड़ा राजनीतिक मंच बनता नजर आ रहा है। जहां कार्यकर्ता अपनी ताकद दिखाने में जुटे हैं, वहीं नेता इस मंच का उपयोग जनसंपर्क और प्रचार रणनीति के तौर पर कर रहे हैं।

प्रशासन के लिए सिरदर्द बना ट्रैफिक और अवैध मंडप

शहर में गणेश मंडलों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। प्रमुख सड़कों पर लगाए जा रहे विशाल मंडपों की वजह से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। प्रशासन ने बिना अनुमति लगाए गए मंडप और मंच हटाने का निर्णय लिया है। हालांकि, राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण यह अमल कर पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। प्रशासन को ‘तार पर चलने’ जैसी मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

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