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धामणगांव रेलवे. आए दिन रेत की कालाबाजारी से जुड़ी ख़बरें चर्चा में रहती हैं, किंतु सरकार तथा प्रशासन द्वारा कुछ ठोस करवाई के अभाव में रेती की कालाबाजारी करने वाले माफियाओं के हौसले मजबूत ही नजर आते है. रेत माफियाओं का नेटवर्क काफी उलझन भरा होने के साथ ही संगठित और संरक्षित भी नजर आता है. राज्य के राजस्व व पुलिस प्रशासन समेत राजनेताओं की सक्रिय संलिप्तता तथा अघोषित संरक्षण के चलते ही रेत माफियाओं के हौसले आसमान पर नजर आते है. जिले में इन दिनों रेत माफियाओं का नेटवर्क तेजी से सक्रिय है. धामणगांव निर्वाचन क्षेत्र के एक बड़े नेता की रेत घाट में हिस्सेदारी इन दिनों चर्चा का विषय बनी है.
पुलिस रिकार्ड के अनुसार गोकुलसरा निवासी अरुण सबाने पर निलेश भील तथा सतीश गोपाले ने हमला कर जख्मी कर दिया था. जिसके बाद रेत माफियाओं का मुद्दा पुनः चर्चा में बना हुआ है. वर्धा नदी के तट पर बसे गावों में विगत कुछ वर्षों में रेती से अर्थार्जन की होड़ मची हुईं है, जिसके चलते गांवों में आर्थिक व्यवहार को लेकर रंजिशें बढ़ गई हैं.
तटीय ग्राम के हर व्यक्ति को रेती में अर्थार्जन की संभावना नजर आने लगी है. कई ग्रामवासी ट्रैक्टर खरीद कर इस धंधे में उतरे हैं. कुछ मजदूर अपने स्तर पर नदी पात्र से रेत निकालकर फिर ट्रैक्टर धारकों को बेचने में व्यस्त है. कई केवल इन अवैध खनन के खिलाफ सरकारी महकमों में शिकायत करने का दंभ दिखाकर अवैध वसूली में लगे है.
अरुण देवीदास सबाने द्वारा रेत की अवैध तस्करी को लेकर जिलाधिकारी के पास दायर शिकयत की, असली मंशा क्या है, इस पर चर्चाओं का बाजार गर्म है. अरुण सबाने यह नाम इससे पूर्व वर्ष 2012 में भी चर्चा में आया था. जब उन्होंने शहर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के सम्मुख भरी सभा में विष प्राशन का प्रयास किया था. अरुण सबाने का यह प्रयोग कही सुर्खियों में रहने की कोशिश तो नहीं, ऐसी चर्चा परिसर में व्याप्त है.
धामणगांव तहसील की सीमा से होकर जाने वाली वर्धा नदी के तट पर बसे गांवों के रेती घाटों का प्रति वर्ष नीलामी कर रेत का ठिया आवंटित किया जाता रहा है, किंतु विगत कुछ वर्षों में विभिन्न कारणों के चलते नीलामी प्रक्रिया से कुछ रेती घाटों को बाहर रखा गया है, और यही से रेती माफियाओं का असली खेल प्रारंभ होता है.
निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण हिस्सा निभाने वाली रेत के खेल में पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग, जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता. जिसके चलते जहां एक ओर नदी नालों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर अर्थार्जन की होड़ में तटीय गांवों का सामाजिक ताना बाना बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
प्रत्येक गांव में ग्राम दक्षता समिति स्थापित की गई है. यह दक्षता समिति अवैध रेत उत्खनन को लेकर प्रतिबंधात्मक उपाय योजना करें. साथ ही राजस्व विभाग स्तर पर उड़न दस्ते भी तैयार किए गए है. जिनके माध्यम से कार्रवाई की जाती है. पुलिस के सहयोग से यह कार्रवाई की जा रही है.-प्रदीप शेलार, तहसीलदार
रेत के कारोबार में चल रही बंदरबांट पर खूब चर्चा होती है, किंतु इसके समाधान पर कोई बात नहीं करता. इस सारे फसाद की जड़ सरकार तथा प्रशासन का लचर रवैया हैं. स्थाई समाधान तब तक संभव नहीं है. जब तक सरकार सम्पूर्ण तैयारी के साथ नीति निर्धारित नहीं करती.-प्रशांत पाटिल, गोकुलसरा
रेती तस्करी पर रोक के लिए अधिकतर अधिकार राजस्व विभाग को प्राप्त है. जब कभी राजस्व विभाग सूचित करता है. हम आगे बढ़कर सहयोग करते है. रेत व्यापार से तटीय ग्रामों में बडी संख्या में बिगड़ता आपसी सौहार्द चिंता का विषय है.-सूरज तेलगोटे, थानेदार मंगरूल दस्तगीर