अमरावती: नामांकन के लिए जाति प्रमाणपत्र अनिवार्य, नगर परिषद व पंचायत चुनाव 2 दिसंबर को होंगे
Amravati News: निर्वाचन आयोग ने नामांकन के समय जाति प्रमाण पत्र जमा कराना अनिवार्य किया है। नगर परिषद व पंचायत चुनाव के लिए नामांकन 10-17 नवंबर तक जमा किए जाएंगे।
- Written By: पूजा सिंह
फाइल फोटो
Submission Of Caste Validity Certificate Is Mandatory: आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा निर्णय लिया है। अब उम्मीदवारों के लिए जाति वैधता प्रमाण पत्र नामांकन के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों के पास यह प्रमाणपत्र फिलहाल उपलब्ध नहीं है, वे जांच हेतु प्राप्त पावती (रसीद) जमा कर सकते हैं।
आगामी 2 दिसंबर को जिले में नगर परिषद व नगर पंचायत के चुनाव निश्चित है। इस दौरान 421 मतदान केंद्र तैयार किए जा रहे हैं। 155 प्रभागों में 278 सदस्यों व 12 अध्यक्ष पदों के लिए 1,79,032 महिला तथा 1,80,015 पुरुष ऐसे कुल 3,59,056 मतदाता 2 दिसंबर को मतदान करेंगें। इन उम्मीदवारों की जीत का ऐलान 3 दिसंबर को होगा। चुनाव में खडे इन उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथी 10 नवम्बर से 17 नवम्बर 2025 तक तय की गई है।
नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर
उम्मीदवार 17 नवम्बर दोपहर 3 बजे तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। वहीं निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार निर्वाचित होता है, तो उसे चुनाव परिणाम घोषित होने के 6 माह के भीतर अपना जाति वैधता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा। निर्धारित समयसीमा में प्रमाण पत्र न देने की स्थिति में सदस्यता रद्द की जा सकती है।
सम्बंधित ख़बरें
अमरावती के मालीपुरा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की चाकू से हत्या, तीन आरोपी गिरफ्तार
अमरावती एमएलसी चुनाव पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर, मतगणना 22 जून को -नामांकन की अंतिम तिथि 1 जून
अमरावती में दर्दनाक हादसा: पुसली बांध में डूबने से तीन मासूम भाई-बहनों की मौत
नाफेड की चना खरीद अवधि बढ़ाई जाए, सांसद काले ने पालकमंत्री बावनकुले से की मांग
ये भी पढ़ें : दो बार वोट करते पाए गए तो…महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर सिंधुदुर्ग कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
आयोग ने सभी संभावित उम्मीदवारों से अपील की है कि वे समय रहते सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे करें और नामांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि या देरी से बचें। निर्वाचन आयोग की यह सख्ती पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
