भंडारा में 283 स्कूल बसों और वैनों की जांच, RTO को मिले कई नियम उल्लंघन

Bhadara School Bus Inspection: भंडारा में आरटीओ ने 283 स्कूल वाहनों की जांच की। इस दौरान क्षमता से अधिक बच्चे बिठाने, खराब स्पीड गवर्नर और घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग जैसी गंभीर लापरवाही मिली।
RTO School Vehicle Checking In Bhandara
भदारा स्कूल बस प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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RTO School Vehicle Checking In Bhandara: भंडारा जिले में स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत जिले की 283 स्कूल बसों और वैनों की सघन जांच की गई। स्कूल खुलने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल बस और वैन के माध्यम से विद्यालय भेजते हैं।

ऐसे में इन वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए आरटीओ ने विशेष अभियान चलाया। जांच के दौरान वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस तथा प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की वैधता की पड़ताल की गई।

क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने का मामला उजागर

जांच में अधिकांश स्कूल वैनों में सीटों की मूल संरचना में बदलाव किए जाने का मामला सामने आया। नियमानुसार जिन वैनों की बैठने की क्षमता 10 विद्यार्थियों की है, उनमें 12 से 20 विद्यार्थियों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। इसके अलावा कई पुरानी वैनों में स्पीड गवर्नर भी खराब पाए गए।

छात्र परिवहन के लिए हैं अलग नियम

विद्यार्थियों के परिवहन के लिए अलग नियमावली निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार स्कूल बस 15 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में स्कूल परिवहन समिति का गठन अनिवार्य है। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश समितियां केवल कागजों तक ही सीमित हैं। RTO ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूल बसों और वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है अथवा जो नियमों का उल्लंघन कर विद्यार्थियों का परिवहन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

सुरक्षा नियमों की हो रही अनदेखी

जांच में यह भी सामने आया कि कई स्कूल प्रशासन और वाहन संचालक फिटनेस, सुरक्षा उपकरणों तथा परिवहन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। भंडारा जिले में अनेक स्कूल वैन अनियमित और जोखिमपूर्ण तरीके से संचालित हो रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

क्षमता से अधिक सवारी और गैस सिलेंडर का उपयोग

कई वैनों में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाकर ले जाया जा रहा है। कुछ वाहनों में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। कई पुरानी और जर्जर वैन तेज गति से संचालित हो रही हैं, जो विद्यार्थियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

स्कूल बस परिवहन समितियां केवल औपचारिकता

नियमानुसार स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार किट, CCTV कैमरे और स्पीड गवर्नर होना अनिवार्य है। इसके बावजूद अनेक वाहनों में ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। स्कूल बस परिवहन समितियों की निष्क्रयता भी विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

RTO की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह

हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में RTO द्वारा जांच अभियान चलाया जाता है, लेकिन उसके बाद पूरे वर्ष ठोस कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है, जांच में नियमों के व्यापक उल्लंघन सामने आने के बावजूद अभिभावकों का मानना है कि नियमित निगरानी और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

विद्यार्थियों का परिवहन संवेदनशील

विद्यार्थियों का परिवहन अत्यंत संवेदनशील विषय है। ऐसे में स्कूल प्रशासन, वाहन संचालकों और संबंधित विभागों को मिलकर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी गंभीर दुर्घटना की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित संस्थाओं पर होगी।

नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

सतीश जाधव, सहायक उपप्रादेशिक परिवहन अधिकारी ने कहा कि जिन स्कूल बसों और वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है तथा जो मोटर वाहन अधिनियम के नियमों का उल्लंघन कर विद्यार्थियों का परिवहन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

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