Anganwadi FRS issue: डिजिटल इंडिया के दौर में तकनीक जहां सहूलियत बननी चाहिए, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में बड़ी बाधा साबित हो रही है। अमरावती के सांसद बलवंत वानखड़े ने नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से मुलाकात कर आंगनवाड़ी सेवाओं में आ रही तकनीकी दिक्कतों और कार्यकर्ताओं की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
सांसद वानखड़े ने बताया कि पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) ऐप में अनिवार्य की गई फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की शर्त ने गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए संकट पैदा कर दिया है। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में चेहरा स्कैन न होने के कारण कई लाभार्थियों को मिलने वाली सरकारी सहायता और पौष्टिक आहार रुक गया है। उन्होंने मांग की कि इस बाध्यता को तत्काल हटाया जाए ताकि कोई भी बच्चा भूखा न रहे।
सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि उन हाथों की भी सुध लेने की अपील की गई है जो इन योजनाओं को जमीन पर उतारते हैं। सांसद ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की पुरानी मांगों को दोहराते हुए कहा कि उन्हें ‘नियमित कर्मचारी’ का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रमुख मांगें रखीं।
सांसद ने स्पष्ट किया कि जब तक आंगनवाड़ी कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तें नहीं दी जाएंगी, तब तक ICDS (एकीकृत बाल विकास सेवा) का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। डिजिटल हाजिरी और चेहरा पहचानने वाली मशीनों के चक्कर में जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाएं तनाव में हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इन मांगों पर संवेदनशीलता से विचार कर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए।