अमरावती: अमृत आहार से आदिवासी महिला, बच्चों का जीवन बदला योजना 34,000 से अधिक लाभान्वित
34,000 से अधिक लाभान्वित आदिवासी महिलाएं और बच्चे, अमृत आहार योजना से जीवन में बदलाव, कुपोषण की समस्या का समाधान।
Amravati District: प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर जिले का दुर्गम मेलघाट क्षेत्र अब अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है. भौगोलिक चुनौतियों और सामाजिक बाधाओं के कारण यहां कुपोषण और माताशिशु स्वास्थ्य हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है.
इस स्थिति को बदलने के लिए जिला परिषद के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अमृत आहार योजना संजीवनी साबित हो रही है. इस योजना से अब तक 34 हजार से अधिक माताएं और बच्चे लाभान्वित हुए है.
इस योजना की शुरुआत 1 दिसंबर 2015 को हुई थी, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को पौष्टिक आहार प्रदान करना है. मेळघाट में यह योजना दो महत्वपूर्ण चरणों में लागू की जा रही है. गर्भावस्था के अंतिम छह महीनों और प्रसव के बाद के शुरुआती छह महीनों तक महिलाओं को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से एक समय का पूर्ण संतुलित भोजन दिया जाता है.
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इसमें दाल, चावल, सब्जी, रोटी के साथसाथ प्रोटीन और विटामिन के लिए अंडे और पौष्टिक लड्डू शामिल हैं. मार्च 2026 में 5,816 ने लिया लाभमार्च 2026 में धारणी और चिखलदरा तहसील की 5,816 माताओं ने इस योजना का लाभ लिया, जिस पर प्रशासन ने 60 लाख रुपये से अधिक खर्च किए. इससे महिलाओं में एनीमिया खून की कमी की समस्या काफी कम हुई है.
बच्चों के लिए पूरक आहारशारीरिक और बौद्धिक विकास में कुपोषण की बाधा को दूर करने के लिए बच्चों को सप्ताह में चार दिन पूरक आहार दिया जाता है. सप्ताह में चार दिन बच्चों को अंडे, केले या अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं. मार्च महीने में मेलघाट के 28,985 बच्चों तक यह लाभ पहुँचाया गया. इसके लिए लगभग 36.32 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था.
जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयनमेलघाट में फैलीं 462 आंगनवाड़ी केंद्रों और स्थानीय आहार समितियों के माध्यम से यह योजना सीधे लाभार्थियों के घर तक पहुंच रही है. जब माताओं को पोषक आहार मिलता है, तो जन्म लेने वाले बच्चे का वजन भी संतुलित होता है, जिससे शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है.
सामाजिक बदलाव की ओर कदमपोषण के अलावा, इस योजना ने महिलाओं और प्रशासन के बीच की दूरी भी कम की है. आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिलाएं अब टीकाकरण, व्यक्तिगत स्वच्छता और परिवार नियोजन जैसे विषयों पर भी जागरूक हो रही हैं. स्थानीय महिलाओं की आहार समितियों में भागीदारी उनके भीतर निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व के गुणों को विकसित कर रही है.
