प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
MGNREGA vs Ji Ram Ji Scheme News: अमरावती जिले में विकास कार्यों, निर्माण परियोजनाओं, खेतिहर मजदूरी और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर वर्ग को अब ‘विकसित भारत-जी राम जी ‘ यानी रोजगार की प्रतीक्षा सताने लगी है। बीते कुछ दिनों से कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की कई बड़ी परियोजनाओं पर काम ठप या सीमित हो गया है, जिससे रोजंदारी पर निर्भर परिवारों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उल्लेखनीय है ग्रामीण रोजगार पिछले करीब दो दशकों से भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का अहम आधार रहा है।
वर्ष 2005 में लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने मजदूरी आधारित रोजगार, ग्रामीण आय स्थिरता और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि समय के साथ ग्रामीण भारत की आवश्यकताएं और संरचना बदल चुकी हैं। बढ़ती आय, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल पहुंच और आजीविका के नए साधनों के चलते रोजगार की जरूरतों का स्वरूप भी बदला है।
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025, जिसे ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025′ कहा जा रहा है, प्रस्तावित किया है। यह विधेयक मनरेगा में व्यापक कानूनी बदलावों का संकेत देता है और ग्रामीण रोजगार को ‘विकसित भारत 2047’ के दीर्घकालीन दृष्टिकोण से जोड़ता है। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए रोजगार गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि जिले में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर अभी तक वरिष्ठ स्तर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अमरावती जिले में इसके अप्रैल माह से लागू होने की संभावना जताई जा रही है।
कई मजदूर रोजगार की तलाश में शहर के अलग-अलग हिस्सों में भटकते नजर आ रहे हैं। वहीं, रोजगार गारंटी योजना के कार्यों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। मजदूर संगठनों ने प्रशासन से तत्काल काम शुरू करने की मांग की है और शासन से रोजगार सृजन के लिए विशेष योजना घोषित करने की अपेक्षा जताई है। मजदूरों का कहना है, काम रहेगा तो चूल्हा जलेगा, काम बंद हुआ तो भूखमरी तय है।
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अमरावती उपजिलाधिकारी ज्ञानेश्वर घ्यार ने इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर अभी वरिष्ठ स्तर से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अप्रैल माह में इस संबंध में दिशा-निर्देश आने की संभावना है।