Navneet Rana Counter Attack: संविधान बड़ा या मजहबी किताब? नवनीत राणा ने प्यारे खान को कटघरे में खड़ा किया

Navneet Rana Counter: पूर्व सांसद नवनीत राणा ने प्यारे खान के आरोपों पर तीखा प्रहार किया है। राणा ने पूछा- क्या प्यारे खान संविधान को अपनी धार्मिक किताब से ऊपर मानते हैं?
Navneet Rana's Counter-Attack: Which Holds Greater Authority—The Constitution or Religious Scriptures? Navneet Rana Puts Pyare Khan in the Dock.
प्यारे खान व नवनीत राणा (सोशल मीडिया)
Updated on

Navneet Rana Counter Attack News: अमरावती के अचलपुर-परतवाड़ा में हुए यौन उत्पीड़न और वीडियो वायरल मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान द्वारा लगाए गए आरोपों पर पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कड़ा पलटवार किया है। राणा ने न केवल प्यारे खान के इस्तीफे की मांग की, बल्कि उनकी निष्ठा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

धार्मिक किताब या संविधान?

नवनीत राणा ने प्यारे खान की आलोचना करते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपराधियों का बचाव शोभा नहीं देता। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि प्यारे खान अपनी धार्मिक किताब से पहले भारत के संविधान पर विश्वास रखेंगे क्या? हम किसी भी परिस्थिति में सबसे पहले देश के संविधान को मानते हैं और उसी के अनुसार न्याय की मांग कर रहे हैं।

राणा की दोटूक बातें

नवनीत राणा ने प्यारे खान द्वारा लगाए गए "दंगे भड़काने" के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राणा ने कहा कि अचलपुर में जिस तरह एक विशेष समुदाय के लड़के ने युवतियों के साथ शर्मनाक हरकत की और वीडियो वायरल किए, उस पर प्यारे खान को शर्मिंदा होना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें समाज से माफी मांगनी चाहिए। पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया कि युवतियों के साथ हुए दुर्व्यवहार के किसी भी मामले में पक्ष नहीं लिया जा सकता। अपराधी केवल अपराधी होता है और उसे सजा मिलना अनिवार्य है। उन्होंने नासिक कॉर्पोरेट कार्यालय में लड़कियों के साथ हुए व्यवहार का जिक्र करते हुए प्रशासन और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

प्यारे खान के आरोप और मांगें

इससे पहले, प्यारे खान ने नवनीत राणा पर आरोप लगाया था कि वे इस संवेदनशील मामले को 'हिंदू-मुस्लिम' रंग देकर दंगे भड़काने का प्रयास कर रही हैं। खान ने मांग की थी कि नवनीत राणा को भाजपा से निष्कासित किया जाए।उनके खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज हो।प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र भेजकर उनकी शिकायत की गई है।

अमरावती में बढ़ता राजनीतिक तनाव

नवनीत राणा के इस आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि वे पीछे हटने वाली नहीं हैं। जहां प्यारे खान इसे शांति भंग करने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं नवनीत राणा इसे महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई करार दे रही हैं। अमरावती पुलिस आयुक्त राकेश ओला के लिए अब यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि दोनों ही पक्ष कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने फायरब्रांड नेता के खिलाफ की गई इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है, जबकि शहर में इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।

Navbharat Live
navbharatlive.com