

Amravati Municipal Corporation: मानसून के दौरान शहर में उत्पन्न होने वाली संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मनपा आयुक्त वर्षा लड्डा ने मनपा मुख्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में आपदा प्रबंधन को लेकर विभिन्न विभागों द्वारा की गई तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
आयुक्त ने नागरिकों के जानमाल की सुरक्षा प्रशासन का सर्वोच्च कर्तव्य है, इसलिए सभी विभाग सामूहिक रूप से आगे आकर आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। फोटो आयुक्त बैठक बैठक में भारी बारिश, बाढ़ जैसी स्थिति, निचले इलाकों में जलभराव, नालों में उफान, पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और सड़कों पर यातायात जाम जैसी संभावित समस्याओं से निपटने के उपायों पर गहन चर्चा की गई।
आयुक्त वर्षा लड्डा ने कहा कि प्राकृतिक आपदा प्रबंधन केवल किसी एक विभाग का काम नहीं है, बल्कि इसमें हर विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी विभाग अपनेअपने क्षेत्रों में संभावित खतरों का आकलन कर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय तुरंत पूरे कर लें। यदि विभागों के बीच सूचनाओं का आदानप्रदान और समन्वय बेहतर होगा, तो हम किसी भी संकट का सामना अधिक सक्षमता से कर पाएंगे। 24 घंटे शुरु रहेगा कंट्रोल रूमनागरिकों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए आपातकालीन नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही आपदा के समय आवश्यक जनशक्ति, मशीनरी, पंपिंग मशीन और जनरेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। शहर में हवातूफान के कारण दुर्घटनाएं रोकने के लिए खतरनाक और सूखे पेड़ों की छंटनी तुरंत पूरी करने के निर्देश दिए गए।
जीर्णशीर्ण और खतरनाक इमारतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया। जल निकासी व्यवस्था को सुचारू रखने और मानसून के दौरान फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। किसी भी आपात स्थिति में बचाव और राहत कार्य के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया।
केवल मनपा नहीं, अन्य विभागों की भी समान जिम्मेदारीबैठक के दौरान आयुक्त वर्षा लड्डा ने साफ तौर पर कहा कि आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल अमरावती मनपा की नहीं है। इसमें महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, महावितरण बिजली कंपनी और पुलिस प्रशासन जैसे अन्य सरकारी विभागों की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि आपदा के समय किसी एक तंत्र पर निर्भर रहने के बजाय सभी संबंधित विभाग अपने अधिकार क्षेत्र की जिम्मेदारियों को तत्परता से निभाएं और जनशक्ति व संसाधन तैयार रखें। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ नियमित रूप से फील्ड क्षेत्रीय स्तर पर जाकर निरीक्षण करें, ताकि समस्या उत्पन्न होने से पहले ही उसका समाधान किया जा सके।