अमरावती मेडिकल कॉलेज की जगह पर विवाद, विधान परिषद में शहर के बीच कॉलेज बनाने की मांग

Aliyabad Medical College: अमरावती के नए शासकीय मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित जगह को लेकर विवाद गहरा गया है। वहीं विधानसभा में महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026 पर भी महत्वपूर्ण चर्चा और सुझाव सामने आए।
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Aliyabad Medical College (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Amravati Government Medical College: अमरावती में बनने वाले नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की जगह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधान परिषद सदस्य संजय खोडके ने राज्य विधानमंडल के उच्च सदन में मौजे आलियाबाद में प्रस्तावित जगह को बदलकर शहर के मध्यवर्ती हिस्से में कॉलेज बनाने की मांग उठाई।

उन्होंने बताया प्रस्तावित जमीन पर 600 से 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट अगर शहर से 12 किमी दूर होगा, तो गरीब मरीजों को वहां पहुंचने में भारी दिक्कत होगी। उन्होंने शहर के भीतर उपलब्ध जिला महिला अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल परिसर की 23 एकड़ जगह, पंजाबराव कृषि विश्वविद्यालय की जमीन (वेलकम पॉइंट) उपलब्ध 75 एकड़ में से 25 एकड़ जगह, मौजे रहाटगांव की 23 एकड़ जमीन, कॉटन फेडरेशन की 25 एकड़ जमीन के सुझाव दिए।

केंद्र सरकार से मंजूरी की प्रतीक्षा: मुश्रीफ

राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने स्पष्ट किया कि आलियाबाद की 11.29 हेक्टेयर भूमि को अनारक्षित करने के लिए वन मंत्रालय के 'परिवेश पोर्टल' पर प्रस्ताव भेजा गया है। मुख्यमंत्री की समिति इस पर केंद्र सरकार से अनुवर्ती कार्रवाई कर रही है। यदि केंद्र सरकार से इस जगह के लिए मंजूरी नहीं मिलती है, तभी विधायक खोडके द्वारा सुझाए गए शहर के मध्यवर्ती विकल्पों पर विचार किया जाएगा। यदि केंद्र से मंजूरी मिल जाती है, तो आलियाबाद की जगह को बदला नहीं जा सकेगा।

महिला किसान विधेयक श्रम व अधिकारों का असली सम्मान

सुलभा विधानसभा के मानसून सत्र में 'महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026' पर चर्चा के दौरान अमरावती की विधायक सुलभा खोडके ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का एक क्रांतिकारी कदम बताया, उन्होंने कहा कि यह विधेयक खेतों में पुरुषों के साथ कधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली महिला खेतिहर मजदूरों के श्रम और अधिकारों का सच्चा सम्मान है।

सुलभा खोडके ने रखे अहम सुझाव

उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर महिला किसान प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाने, जटिल दस्तावेजों की अनिवार्यता खत्म करने, महिलाओं को सीधे बैंक ऋण, सरकारी सब्सिडी और योजनाओं का लाभ देने हर जिले में सलाहकार कक्ष स्थापित करने, महिलाओं को कृषि क्षेत्र की नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित कौशल विकास प्रशिक्षण देने, पारंपरिक किसानों के साथ-साथ आदिवासी, एकल, और अल्पभूधारक महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान, साथ ही उनके लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और वृद्धावस्था पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तैयार करने के सुझाव दिए।

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