

Amravati Garba Partner Social Media Poster: अमरावती में गरबा के नाम पर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित पार्टनर पोस्टरों ने अमरावती में हलचल बढ़ा दी है। इन पोस्टरों में महिला-पुरुष पार्टनर उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग श्रेणियों में 4,000 से 6,000 तक शुल्क लेने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन पोस्टरों की सत्यता की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपराध शाखा को सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों की जांच के निर्देश दिए हैं।
अमरावती। नवरात्रि के गरबा आयोजनों के बीच सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ कथित पोस्टरों को लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है। इन पोस्टरों में गरबा पार्टनर और दांडिया पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।
कथित पोस्टरों में गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम जैसी अलग-अलग श्रेणियां दर्शाते हुए उनके अनुसार शुल्क लिए जाने की बात कही गई है। इनमें 4,000 से 6,000 तक रकम का उल्लेख होने की जानकारी सामने आई है।
पोस्टरों में आकर्षक डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है। प्रथम दृष्टया इनके AI के माध्यम से तैयार किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, यह दावा भी अभी आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है।
मामला पुलिस आयुक्त राकेश ओला के संज्ञान में आने के बाद पुलिस प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अपराध शाखा की इकाइयों को सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों की सत्यता की पड़ताल करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस आयुक्त ने शहर के प्रोफेशनल गरबा आयोजकों को भी पूछताछ के लिए बुलाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वायरल पोस्टर वास्तव में किसी गरबा आयोजन से जुड़े हैं या किसी व्यक्ति ने फर्जी तरीके से तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए हैं।
इन कथित पोस्टरों को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित कुछ संगठनों ने भी पुलिस आयुक्त से चर्चा की। संगठनों ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की।
उनका कहना है कि गरबा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है और इसके नाम पर आपत्तिजनक या गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने कहा कि गरबा रास को मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का माध्यम माना जाता है। व्यावसायिक स्तर पर गरबा आयोजन अलग विषय है, लेकिन शुल्क लेकर महिला-पुरुष पार्टनर उपलब्ध कराने संबंधी दावों की गंभीरता से जांच की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि पोस्टरों में किए गए दावों की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की वास्तविकता और उसके स्रोत की जांच कर रही है।