Amravati Agriculture Crisis News: अमरावती किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं, पैकेज और राहत योजनाएं लागू की गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याएं कम होती नजर नहीं आ रही हैं।
लगातार फसल खराब होना, कर्ज का बोझ और आर्थिक तंगी के कारण जिले में किसान आत्महत्याओं का सिलसिला अब भी जारी है। जिले में हर साल लगभग 200 से 300 किसान आत्महत्या करते हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति है। चालू वर्ष के पहले तीन महीनों में ही 42 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। पिछले वर्ष जनवरी से मार्च के दौरान 33 किसानों ने आत्महत्या की थी।
इस वर्ष इसके मुकाबले 9 मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकारी आंकड़ों से स्पष्ट है। खेती की बढ़ती लागत राज्य में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, लेकिन किसान आत्महत्या के मुद्दे पर शासन और प्रशासन अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है, ऐसी आलोचना हो रही है।
केवल कर्ज ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाएं, फसल नुकसान, खेती की बढ़ती लागत और आय में अनिश्चितता भी किसानों को यह कदम उठाने पर मजबूर कर रही है। योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ पहले महाडीबीटी प्रणाली के कारण कई जरूरतमंद किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल सका, ऐसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
साथ ही, आत्महत्या प्रभावित जिलों के लिए शुरू की गई कुछ योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। किसान मिशन जैसे उपक्रम भी संकटग्रस्त किसानों को पर्याप्त सहारा नहीं दे पाए हैं। जिले में जनवरी में 14, फरवरी में 13 और मार्च में 15 किसानों ने आत्महत्या की है।
इन 42 मामलों में से केवल 4 मामलों को पात्र घोषित किया गया है, जबकि 2 मामले अपात्र ठहराए गए हैं। शेष 36 मामले जांच के लिए लंबित हैं। इनमें से 5 मामले संबंधित कार्यालय में प्राप्त हुए हैं, जबकि बाकी मामलों को शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश तहसीलदारों को दिए गए हैं, ऐसा जिला प्रशासन ने बताया।
सहायता राशि में बढ़ोतरी नहीं किसान आत्महत्या के बाद उनके परिवार को राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि, कई वर्षों से इस राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। साथ ही, हर मामला सरकारी मापदंडों में फिट नहीं बैठने के कारण कई परिवारों को सहायता नहीं मिल पाती है।
जनवरी 2001 से 31 मार्च 2026 तक अमरावती जिले में कुल 5603 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 2972 मामले सरकारी सहायता के लिए पात्र पाए गए, जबकि 2586 मामले अपात्र ठहराए गए हैं। 45 मामले अभी भी जांच के लिए लंबित हैं। इस स्थिति में किसान परिवारों के सामने जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है और सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की जा रही है।
चालू वर्ष के 3 महीनों की स्थिति माह आत्महत्याजनवरी 14 फरवरी 13 मार्च 15 कुल 42 अमरावती जिले की कुल स्थिति 2001 से 20265,603 आत्महत्या 2,972 पात्र मामले 2,586 अपात्र मामले 45 लंबित पिछले वर्ष किसान आत्महत्या की स्थिति माह कुल पात्र अपात्रजनवरी 9 6 3 फरवरी 10 6 4 मार्च 14 8 6 अप्रैल 18 9 9 मई 16 13 13 जून 18 9 9 जुलाई 16 9 7 अगस्त 18 13 4 सितंबर 14 6 8 अक्टूबर 15 8 6 नवंबर 15 9 4 दिसंबर 12 3 4 कुल 185 99 77
सरकार विफल साबित हुई जिले में रोज किसान आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन सरकार के मापदंडों के अनुसार कई आत्महत्याओं को सहायता के लिए अपात्र घोषित कर दिया जाता है। सरकार की उदासीन नीतियों के कारण ही आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। कर्जमाफी की घोषणा तो की गई है, लेकिन उसके पूरी तरह लागू होने पर भी संदेह है। आत्महत्या रोकने में सरकार विफल रही है।
प्रवीण मोहोड, किसान, जिलाध्यक्ष स्वाभिमानी शेतकरी संगठन