डब्बा पार्टी का खौफनाक अंत, अमरावती के धातखेड़ा तालाब में डूबे चार मासूम, पिकनिक बनी आखिरी सफर

Ghatkheda Pond Accident: अमरावती के धातखेड़ा तालाब में पिकनिक मनाने गए चार बच्चों की डूबने से मौत हो गई। रील बनाने और तैरने के दौरान हुए इस हादसे ने 4 परिवारों की खुशियां छीन लीं।
The Tragic End of the 'Dabba Party': Four Innocents Drown in Amravati's Dhatkheda Pond Picnic Turns into a Final Journey.
घटनास्थल की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Amravati Drowning Case: जहाँ एक ओर रविवार को पूरा देश Mothers Day मना रहा था, वहीं अमरावती जिले के धातखेड़ा तालाब पर हुई एक भीषण दुर्घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया। रील बनाने और तैरने के जुनून में चार बच्चों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस घटना ने पूरे अमरावती जिले को झकझोर कर रख दिया है।

डब्बा पार्टी का दुखद अंत

जानकारी के अनुसार, खोलापुरी गेट थाना क्षेत्र के करीब 8 से 9 बच्चे रविवार की छुट्टी का आनंद लेने के लिए शहर से 10 किलोमीटर दूर धातखेड़ा तालाब पर डब्बा पार्टी (पिकनिक) के लिए गए थे। दोपहर का भोजन करने के बाद, उत्साह के अतिरेक में कुछ बच्चे रील बनाने और तैरने के लिए पानी में उतरे। इसी दौरान एक बच्चा गहरे पानी का अंदाजा न होने के कारण डूबने लगा। उसे बचाने के प्रयास में एक युवती और दो अन्य बच्चे भी एक-एक कर गहरे पानी में समा गए।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही फ्रेजरपुरा थाना प्रभारी रोशन शिरसाठ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी कार्यालय के आपदा प्रबंधन दल ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और चारों को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है

  • सोनाली नरेंद्र जोशी (16)
  • आदित्य नरेंद्र जोशी (12)
  • पायल बबलू पंडित (21)
  • यश गजानन काकणे (13)

अधिकारियों का बयान

डीसीपी गणेश शिंदे ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, फ्रेजरपुरा थाना क्षेत्र के पास धातखेड़ा गांव का एक तालाब है। एक ही परिवार के लगभग नौ बच्चे वहां पिकनिक मनाने गए थे। भोजन के बाद वे तैरने के लिए पानी में उतरे। जो तैरना जानते थे वे आगे निकल गए, लेकिन पानी की गहराई और दम घुटने (Suffocation) के कारण चार बच्चों की डूबकर मौत हो गई।

रील के शौक ने उजाड़े घर

आज के दौर में सोशल मीडिया रील बनाने का क्रेज युवाओं की जान पर भारी पड़ रहा है। जिस दिन इन बच्चों को अपनी मां को शुभकामनाएं देनी चाहिए थीं, उसी दिन उन माताओं के सामने उनके बच्चों के शव पड़े थे। माताओं का करुण क्रंदन देख मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

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