Akola News: आदिमाया को संपूर्ण ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा और त्रिलोक्य की शुरुआत माना जाता है. उनका स्वरूप विश्वव्यापी है, जिससे ही सब कुछ उत्पन्न होता है और उसीमें सब विलीन हो जाता है.
इस आदी माया का समुचा वर्णन श्रीमद् देवी भागवत में किया गया हैं. नित्य श्रवण करने से दोषमुक्ति होती है, ऐसा हितोपदेश पु. शास्त्री जनक जोशी ने दिया. जय अंबे माता संस्थान और डॉ. तृप्ति मुकेश भाटिया की ओर से शास्त्री नगर स्थित जय अंबे माता संस्थान प्रांगण में चल रही पु. शास्त्री जनक जोशी की श्रीमद् देवी भागवत कथा में उन्होंने पंचम पुष्प गुंफाते हुए आदिमाया की महिमा विस्तार से बताई.
इस संगीतमय देवी कथा में नित्य विभिन्न देवियों की आकर्षक और विहंगम झांकियां साकार की जाती हैं, जिससे मंडप में भीड़ उमड़ पड़ती है. कथा में कई मान्यवर और महिला मंडलों ने उपस्थिति दर्ज कर आरती में हिस्सा लिया. सबसे पहले संत पूजन और यजमान तृप्ति भाटिया व मुकेश भाटिया ने पूजन किया. कथा की पूर्णाहुति रामनवमी, 26 मार्च को होगी.