किसानों को 5 हजार रुपए की मदद देना मजाक, रोहित पवार ने अकोला से सरकार पर साधा निशाना

Rohit Pawar Akola Visit: राकां शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने अकोला दौरे के दौरान किसानों को 5 हजार रुपए की सहायता देने पर राज्य सरकार की आलोचना की।
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रोहित पवार अकोला दौरा(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • रोहित पवार ने कहा कि किसानों को केवल 5 हजार रुपए देना गरीब किसानों का मजाक उड़ाने जैसा है।

  • उन्होंने आरोप लगाया कि कपास आयात शुल्क संबंधी निर्णय की अवधि बढ़ाने के बावजूद बाजार में कपास के भाव 400 से 500 रुपए तक गिर गए।

  • रोहित पवार ने कहा कि करीब 55 लाख किसानों में से केवल 16 लाख तक राशि पहुंचने की जानकारी है, जबकि कई किसान अब भी लाभ से वंचित हैं।

Akola Farmers Suicide Crisis: किसानों को 5 हजार रु. देना गरीब किसानों का मजाक उड़ाने समान है। इससे अच्छा है कि सरकार सहायता ही न दे। शुरुआत में 50 हजार रु. और बाद में 50 हजार रु. दिए होते, तो भी उचित था। लेकिन केवल कुछ देने के लिए देना और उसे देते समय उपकार करने जैसा व्यवहार करना सही नहीं है।

यह आरोप राकां शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने गुरुवार को अकोला दौरे के दौरान लगाया। वे शिवसेना उबाठा के विधायक नितिन देशमुख के निवास पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूखे की सहायता का वितरण शुरू होने के बावजूद अब तक कई किसानों को राशि नहीं मिली है।

आवाज दबाने का प्रयास

किसानों के लिए आंदोलन करने का खामियाजा विधायक नितिन देशमुख को भुगतना पड़ रहा है। उनके विकास कार्य रद्द कर राज्य सरकार उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। रोहित पवार ने कहा कि अकोला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कपास की खेती होती है। सरकार ने कपास आयात शुल्क संबंधी निर्णय की अवधि 31 अगस्त से बढ़ाकर दिसंबर तक कर दी।

किसानों को उम्मीद थी कि इससे कपास का भाव 10 हजार रु. तक पहुंचेगा, लेकिन इसके विपरीत बाजार में 400 से 500 रु. की गिरावट आई है। किसानों और खेत मजदूरों की समस्याओं की अनदेखी करने पर आगामी विधानसभा अधिवेशन सरकार के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।

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मावा के मामले में आयुक्त से पूछेंगे जवाब

अकोला में लाखों रुपए का मावा आखिर कहां गया, यह सवाल उठाए जाने पर रोहित पवार ने कहा कि वे जानकारी लेकर राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे से जवाब मांगेंगे, उन्होंने राज्य में गुजरात से मिलावटी मावा आने का दावा भी किया।

इसी तरह उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न सरकारी विभागों में मराठी ठेकेदारों के करीब 90 हजार करोड़ रु. के भुगतान प्रलंबित हैं। गुजरात और आंध्र प्रदेश की कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी अधिवेशन में ठेकेदारों ने यह मुद्दा उठाया, तो उनकी आवाज बुलंद की जाएगी।

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किसान आत्महत्याओं का खतरा

जिले में किसानों की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए रोहित पवार ने किसान आत्महत्याओं का खतरा बढ़ने की आशंका व्यक्त की। उन्होंने बताया कि आत्महत्या रोकने के लिए परामर्श देने वाली हेल्पलाइन पर किसानों के बड़ी संख्या में फोन आ रहे हैं। रैली निकालने के बजाय जमीनी स्थिति को समझकर किसानों की मदद की जानी चाहिए।

सरकार आंकड़े कहां से ला रही है

रोहित पवार ने कर्जमाफी के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 55 लाख किसानों में से 16 लाख किसानों तक राशि पहुंचने की जानकारी मिल रही है, लेकिन गांवों में किसान अब भी लाभ नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में सरकार आंकड़े कहां से ला रही है? अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे है या सरकार जनता को, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी दावों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर है।