हाथगांव में गायब सभागृह प्रकरण से प्रशासन पर उठे सवाल, प्रशासनडेढ़ करोड़ की मंजूरी कागजों पर, जमीन पर कुछ नहीं
हाथगांव में डेढ़ करोड़ रुपये का सभागृह कागजों पर है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं। प्रशासन की विश्वसनीयता पर उठे सवाल।
Akola News: मुर्तिजापुर तहसील के हाथगांव ग्राम पंचायत में पंद्रहवें वित्त आयोग से मंजूर किए गए डेढ़ करोड़ रुपये के सभागृह का कोई अस्तित्व नहीं है. यह धक्कादायक तथ्य सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कागजों पर विकास और जमीन पर शून्य का उदाहरण है.
मामला केवल लापरवाही है या नियोजित अनियमितता का है, इस पर संशय गहरा गया है.एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसीलदार शिल्पा बोबडे की अध्यक्षता में 15 अप्रैल को ग्राम पंचायत कार्यालय में बैठक आयोजित की गई, लेकिन डेढ़ करोड़ रुपये के निधि का ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया. पंचायत समिति, राजस्व और निर्माण कार्य विभाग के अधिकारी एकदूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे और अंततः जिला परिषद प्रशासन की ओर इशारा किया गया. ठोस जानकारी या कागजात किसी ने प्रस्तुत नहीं किए, जिससे आर्थिक अनियमितता की आशंका और बढ़ गई.
ग्रामस्थों ने आरोप लगाया कि सूचना के अधिकार के तहत बारबार मांग करने पर भी प्रशासन ने जानकारी छिपाई. विधायक ने सवालों की बौछारबैठक में विधायक हरीश पिंपले ने प्रशासन पर सवालों की बौछार की और इसे कागजी घोटाला करार दिया. सरपंच की बैठक में अनुपस्थिति ने संदेह और गहरा कर दिया. उपस्थित पुलिस पाटिल और पटवारी भी सभागृह के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाए.
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निधि आखिर गई कहां
ग्रामीणों ने सीधा सवाल उठाया कि जब सभागृह बना ही नहीं, तो निधि आखिर गया कहां. क्या कागजों पर काम पूरा दिखाकर निधि की अनियमितता की गयी है. तहसीलदार शिल्पा बोबडे के मार्गदर्शन में जांच शुरू है, लेकिन अब तक की घटनाओं ने प्रशासन की विश्वसनीयता को डगमगा दिया है. जब तक सत्य सामने नहीं आता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, हाथगांव का यह गायब सभागृह प्रकरण प्रशासन के गले की फांस बना रहेगा.
