अकोला में देरी से बरसे बादल; 6 जुलाई तक केवल 37% खरीफ बुआई पूरी, किसानों को अब भी दमदार बारिश का इंतजार
Akola Kharif Sowing: अकोला जिले में मानसून की देरी से खरीफ बुआई प्रभावित हुई है। 6 जुलाई तक केवल 37.21% क्षेत्र में बोनी हुई है। मूंग-उड़द का समय निकलने से किसान अब कपास की ओर रुख कर रहे हैं।
- Written By: केतकी मोडक
शिरीश धोत्रे (सोर्स- फोटो नवभारत)
Akola Kharif Sowing Status Report: इस वर्ष खरीफ सीजन में मानसून की बारिश में देरी होने के कारण अकोला जिले में बुआई का कार्य प्रभावित हुआ है। हालांकि जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों ने खेतों का रुख किया और बुआई शुरू की गई है। कृषि विभाग की 6 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार जिले के कुल 4 लाख 32 हजार 10 (4,32,010) हेक्टेयर बुआई योग्य क्षेत्र में से 1 लाख 60 हजार 736.54 (1,60,736.54) हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है, जो कुल क्षेत्रफल का 37.21% है।
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष फसल पद्धति में बड़ा बदलाव तो नहीं दिख रहा है, लेकिन कपास के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसका प्रमुख कारण यह है कि मूंग और उड़द की बुआई का उपयुक्त समय अब समाप्त हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि अब इन फसलों की बुआई करने पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
यही वजह है कि अधिकांश किसान अब कपास की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। अकोला जिले में किसानों को अभी भी दमदार बारिश का इंतजार है। किसानों का कहना है कि अभी भी बुआई में पूरी तरह से तेजी नहीं आई है। दमदार बारिश के बाद निश्चित ही खरीफ फसलों की बुआई में और तेजी आएगी।
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मूंग-उड़द की जगह कपास की बुआई बढ़ी :
मानसून में हुई देरी के कारण मूंग और उड़द की बुआई का अनुकूल समय निकल जाने से इन दोनों फसलों की बुआई का क्षेत्र इस वर्ष घटा है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि अब मूंग और उड़द की बुआई करने से अपेक्षित उत्पादन मिलने की संभावना कम है। ऐसे में अधिकांश किसानों ने इन फसलों के बजाय कपास की बुआई को प्राथमिकता दी है।
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बुआई में देरी से फसलें होंगी प्रभावित
कृषि उपज बाजार समिति सभापति शिरीश धोत्रे ने कहा है कि इस वर्ष मानसून की बारिश में देरी होने के कारण खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। खरीफ फसलों में मुख्य रूप से कपास और सोयाबीन के उत्पादन में कमी होने की आशंका है। यदि अब अच्छी बारिश हो जाती है, तो खरीफ फसलों के लिए बहुत बेहतर रहेगा।
