खामगांव में ज्ञानगंगा अभयारण्य में 20 जल निकाय तैयार, प्यासे वन्यजीव अब बस्तियों की ओर नहीं आएंगे
ज्ञानगंगा अभयारण्य में भीषण गर्मी के चलते वन विभाग ने 20 कृत्रिम जल निकाय बनाए हैं। टैंकरों और सौर पंपों के जरिए पानी की आपूर्ति कर वन्यजीवों को बस्तियों में आने से रोका जा रहा है।
वन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर कृत्रिम जल निकाय बनाए जाते हैं। ये जल निकाय जंगली जानवरों की प्यास बुझाने में जीवनदायिनी भूमिका निभाते हैं। ज्ञानगंगा अभयारण्य में लगभग 20 जल निकायों का पुनरुद्धार किया जा चुका है।
इन जल निकायों में टैंकरों या पाइपलाइनों के माध्यम से नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है। वन विभाग की यह पहल जंगली जानवरों को प्यास बुझाने के लिए मानव बस्तियों के पास आने से रोकने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
जंगल में तेज धूप के कारण नदियां, धाराए और झीलें जैसे प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाते हैं। इसके कारण जंगली जानवर पानी की तलाश में मानव बस्तियों की ओर दौड़ पड़ते हैं। उन्हें रोकने के लिए जल निकाय बनाए जाते हैं। इनमें सीमेंट से बने जल निकाय और निश्चित दूरी पर बने टैंक शामिल हैं। या फिर गड्ढे खोदे जाते हैं। उनमें मोटी प्लास्टिक की चादर बिछाई जाती है और पानी जमा किया जाता है। इस जलाशय को टैंकर द्वारा नियमित रूप से पानी से भरा जाता है। या फिर बोरवेल में सौर पंप द्वारा स्वचालित रूप से पानी भरा जाता है।
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जल निकायों में पानी छोड़ा जाता है। ज्ञानगंगा में बने 20 जलाशयइन जल निकायों के कारण जंगली जानवर मानव बस्तियों की ओर भागने से बचते हैं। ज्ञान गंगा अभयारण्य में विभिन्न स्थानों पर इस प्रकार के लगभग 20 जल निकाय बनाए गए हैं।
इन जल निकायों की प्रतिदिन सफाई की जाती है और इनमें पानी भरा जाता है। इनमें पानी भी समयसमय पर बदला जाता है। यह सावधानी इसलिए बरती जा रही है ताकि जंगली जानवरों को अन्य बीमारियां न लगें। ज्ञान गंगा अभयारण्य के ये जल निकाय अब जंगली जानवरों के लिए जीवनदायिनी बन गए हैं।
