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धूल खा रहे हैं जीएमसी के पीएसए प्लांट, जीएमसी को खरीदना पड़ रहा है ऑक्सीजन

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: Dec 18, 2022 | 10:03 PM
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अकोला. हवा से मेडिकल ऑक्सीजन लेने के तीन पीएसए (प्रेशर स्विंग एडजॉर्शन) प्लांट, जो सरकारी मेडिकल कॉलेज और सर्वोपचार अस्पताल में कोविड संक्रमण काल ​​में स्थापित किए गए थे, वर्तमान में उपयोग में नहीं हैं, जिससे वे धूल खा रहे हैं. इसलिए फिलहाल जीएमसी को ऑक्सीजन खरीदनी पड़ रही है.

इस प्लांट के जरिए ऑपरेशन थियेटर और इंटेंसिव केयर यूनिट में ऑक्सीजन की आपूर्ति करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है. इसके अलावा, रखरखाव और जनशक्ति सहित इन तीन परियोजनाओं की वार्षिक लागत दो करोड़ से अधिक होने के कारण, चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि ऑक्सीजन खरीदना और उपयोग करना सर्वपचार अस्पताल के लिए सुविधाजनक है.

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कोविड प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की भारी जरूरत थी. उस समय सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी थी. समय पर ऑक्सीजन बेड नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली गई थी. इस कठिन परिस्थिति से निकलने के लिए जिले में एलएमओ यानी लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन और पीएसए यानी प्रेशर स्विंग एडजॉर्शन यह मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए.

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यह प्लांट कोविड के दौरान कई मरीजों के लिए जीवन रक्षक बन चुका हैं. लेकिन कोविड के बाद ये बेकार पड़े हुए हैं. चिकित्सा विशेषज्ञों की राय है कि गहन देखभाल इकाई या ऑपरेशन थियेटर में इस संयंत्र द्वारा उत्पादित ऑक्सीजन को रोगियों को देना तकनीकी रूप से सुविधाजनक नहीं है. जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि पीएसए प्लांट केवल कोविड के लिए ही उपयोगी है.

कुल पांच प्लांट

तीन पीएसए प्लांट के अलावा सर्वोपचार अस्पताल में दो एलएमओ यानी लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट हैं. इनमें से प्रत्येक संयंत्र की क्षमता 10 केएल (किलो लीटर) है. पुराने भवन में मेडिसिन वार्ड के नए भवन में शिफ्ट होने के बाद इस प्लांट का उपयोग किया जा सकता है. कोविड में ऑक्सीजन की जरूरत खत्म होने से जीएमसी क्षेत्र में स्थापित महाजनको का पारस स्थित थर्मल पावर प्लांट का उपयोग पारस में बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकेगा.

प्लांट का रखरखाव महंगा

पीएसए ऑक्सीजन के एक संयंत्र के लिए प्रबंधन और जनशक्ति की वार्षिक लागत 80 लाख रुपये है. इस प्रकार तीन संयंत्रों की वार्षिक लागत 2 करोड़ 40 लाख रुपये से 2 करोड़ 60 लाख रुपये तक हो सकती है. सर्वोपचार अस्पताल सालाना आवश्यक मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने के लिए दो करोड़ रुपये खर्च करता है.

पीएसए प्लांट की स्पीड तीन से छह लीटर प्रति मिनट होती है. लेकिन वेंटिलेटर को 10 से 12 लीटर प्रति मिनट की दर से गैस की जरूरत होती है. इसलिए खर्च के बावजूद वेंटिलेटर और इंटेंसिव केयर यूनिट में ऑक्सीजन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. यह प्लांट वार्ड के गिने-चुने और सामान्य रोगियों के लिए लाभकारी होता है. लेकिन इतनी डिमांड नहीं है.

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Published On: Dec 18, 2022 | 10:03 PM

Topics:  

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