आजादी के 75 साल बाद भी धामोडी का ‘वनवास’ जारी: 9 में से केवल डेढ़ किमी बनी सड़क, ग्रामीणों ने घेरा प्रशासन
दर्यापुर के धामोडी गांव में 75 वर्षों से पक्की सड़क का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। 9 किमी की मंजूर सड़क में से केवल 1.5 किमी का काम हुआ है, जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
Dhamodi Village Infrastructure: दर्यापुर तहसील के अंतर्गत आने वाला धामोडी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। आज़ादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। खासतौर पर एक पक्की सड़क की मांग वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिसके कारण ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन हो गया है।
सड़क का अधूरा सपना
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के लिए लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत की गई थी। लेकिन वास्तविकता में केवल करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क का ही निर्माण किया गया है। शेष सड़क आज भी कागजों और सरकारी फाइलों में ही सीमित है। इस अधूरे निर्माण के चलते गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अनशन के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने 2 दिनों तक कड़ा अनशन भी किया, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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बरसात में कट जाता है संपर्क
सड़क न होने का सबसे ज्यादा असर मानसून के दौरान देखने को मिलता है। बारिश के समय गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्तों के कारण
- मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना जोखिम भरा हो जाता है
- स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है
- किसानों के लिए अपनी फसल मंडियों तक ले जाना लगभग असंभव हो जाता है
प्रशासन को चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शेष सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका सवाल है कि क्या उन्हें अपने ही अधिकारों के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ेगा।
प्रशासन का पक्ष
दर्यापुर जिला परिषद के निर्माण विभाग ने बताया है कि सड़क का काम शुरू किया जा चुका है और जैसे ही शेष फंड उपलब्ध होगा, बाकी निर्माण कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
सरपंच की प्रतिक्रिया
धामोडी की सरपंच पूनम अमोल गावंडे ने भी गांव की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की हकीकत को भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस समस्या का समाधान करता है और धामोडी गांव के “75 वर्षों के वनवास” को खत्म कर पाता है।
