

Khamgaon Cotton Farming: अकोला जिले में गर्मी बढ़ने से मानसून से पहले की कपास की खेती प्रभावित हो रही है। तापमान में लगातार वृद्धि के चलते किसानों ने कपास की खेती कुछ समय के लिए स्थगित कर दी है और वे अपेक्षित बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
हर साल, कुछ किसान मानसून से पहले कपास बोकर उसकी जल्दी कटाई करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, इस साल बढ़ती गर्मी के कारण कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि खेत जमिन में नमी कम हो गई है, जिससे अंकुरण क्षमता प्रभावित हो सकती है। उच्च तापमान के कारण बीजों का अंकुरण कम होना, पौधों का बौना रह जाना या शुरुआती अवस्था में विकास रुक जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसी वजह से कई किसान फिलहाल बुवाई से बच रहे हैं। कपास के बीजों की बिक्री 15 मई से शुरू हो चुकी है और अधिकांश किसानों ने बुवाई की तैयारी पूरी कर ली है। 1 जून के बाद कपास की खेती में तेजी आने की संभावना है। हालांकि मौजूदा उच्च तापमान के कारण जिले में कपास की खेती धीमी हो गई है, लेकिन उम्मीद है कि 1 जून के बाद खेती में तेजी आएगी।
किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं और मौसम अनुकूल होते ही बड़े पैमाने पर बुवाई शुरू होने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल कपास की फसल का पूर्वानुमान काफी हद तक मौसम में बदलाव, तापमान और मानसून के आगमन पर निर्भर करेगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कपास की खेती के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और नियंत्रित तापमान आवश्यक हैं। भीषण गर्मी में बुवाई करने से बीजों के अंकुरण पर असर पड़ सकता है। इसलिए, पहली बारिश के बाद या धूप कम होने के बाद कपास की बुआई करना अधिक लाभदायक होता है। अनुकूल वातावरण में बुआई करने से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन की संभावना बढ़ जाती है।