Akola News: अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष रविवार, 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस अवसर पर जिले में कहीं भी बाल विवाह न हों, इसकी विशेष सावधानी बरतने का आह्वान जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी लक्ष्मण हगवणे ने किया है.
भारतीय संस्कृति में विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक क्रिया है. अक्षय तृतीया का मुहूर्त शुभ माना जाता है और इस दिन सामूहिक व व्यक्तिगत विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं. शासन ने विवाह के लिए लड़कों की आयु 21 वर्ष और लड़कियों की आयु 18 वर्ष निर्धारित की है. इससे कम आयु में होने वाले विवाह बाल विवाह कहलाते हैं और बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम 2006 के अनुसार अवैध हैं.
ऐसे विवाह कराने वालों पर अपराध दर्ज किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसेवक बाल विवाह प्रतिबंध अधिकारी होते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में बाल विकास प्रकल्प अधिकारी यह जिम्मेदारी निभाते हैं. गांवों में गठित ग्राम बाल संरक्षण समितियों के अध्यक्ष सरपंच और सदस्य पुलिस पाटिल होते हैं. इसलिए सरपंच, पुलिस पाटिल, ग्रामसेवक और आंगनवाड़ी सेविकाओं को इस विषय पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है.
बाल विवाह होने पर विवाह समारोह में शामिल होने वाले, वाजंत्री, मंगल कार्यालय, बिछायत केंद्र, विवाह विधि संपन्न कराने वाले तथा वरवधू के मातापिता सभी पर अपराध दर्ज हो सकता है. कानून में बाल विवाह कराने वालों के लिए पांच लाख रुपये जुर्माना और दो वर्ष तक सश्रम कारावास का प्रावधान है.
हेल्पलाइन नंबर पर दें सूचनाजिला महिला व बाल विकास अधिकारी लक्ष्मण हगवणे ने कहा कि अकोला को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए सभी को सतर्क रहना होगा. यदि कहीं बाल विवाह तय हुआ हो तो उसकी जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या पुलिस विभाग के 112 टोलफ्री नंबर पर तुरंत दें. यह आह्वान समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.