Bhandara News: सिहोरा जिले में मूलभूत सुविधाओं के लिए चलाई जा रही जनसुविधा योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरपंच संगठन ने आरोप लगाया है कि यह योजना अब आम जनता के बजाय राजनीतिक नेताओं की “धनसुविधा” बनकर रह गई है।
संगठन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से जिले की कई ग्राम पंचायतों को इस योजना के तहत कोई निधि नहीं मिली, जबकि कुछ चुनिंदा गांवों को बार-बार फंड दिया जा रहा है। निधि वितरण में स्पष्ट मापदंडों की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के सड़क, जलापूर्ति, समाज मंदिर और बस्ती विकास जैसे आवश्यक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कई सरपंचों ने बार-बार निवेदन के बावजूद निधि न मिलने की शिकायत की है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह गहरा गया है। संगठन के अनुसार, योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है।
सरपंच संगठन ने मांग की है कि जनसुविधा योजना के तहत पिछले 3 से 5 वर्षों में हुए निधि वितरण का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। साथ ही सभी कार्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
संगठन ने यह भी कहा कि जनसुविधा, तांडा-बस्ती, ठक्कर बाप्पा, दलित बस्ती और अल्पसंख्यक विकास जैसी योजनाओं में पारदर्शिता लाकर सभी ग्राम पंचायतों को समान न्याय मिलना चाहिए।
इस मुद्दे पर शासकीय विश्राम गृह, भंडारा में सरपंच संगठन की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला अध्यक्ष शरद इटवले, महासचिव पारस भुसारी, सलाहकार आशीष माटे, प्रवक्ता मनोहर बोरकर, शामराव बेंदवार, प्रसिद्धि प्रमुख रेश्मा ईश्वरकर समेत विभिन्न तहसीलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने पर संगठन ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।