Akola News: किसान संगठन शरद जोशी द्वारा स्थापित ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा एचटीबीटी कपास बीजों पर रोक लगाने के निर्णय की कड़ी निंदा की है. संगठन का कहना है कि यह कदम कृषि अर्थशास्त्र और जमीनी वास्तविकताओं की गलत समझ को दर्शाता है.
10 जून 2019 से किसान तकनीकी स्वतंत्रता सत्याग्रह चल रहा है. इस वर्ष इसकी शुरुआत 10 जून 2026 को गुजरात सीमा नंदुरबार से होगी, जहां किसान एचटीबीटी बीजों के साथ मार्च करेंगे. यह जानकारी पत्र परिषद में किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित बहाले ने दी. किसानों के पास अब केवल एफ2 एचटीबीटी बीजों का विकल्प बचेगा, जो उत्पादन के दृष्टिकोण से अनुपयुक्त है.
राज्य सीमाओं पर बीजों का प्रवाह रोकना अव्यावहारिक और आर्थिक रूप से अनुचित है. संगठन ने आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों से इन बीजों का उपयोग हो रहा है और विभाग की अचानक सक्रियता 200 करोड़ रु. की रिश्वत की चर्चाओं को बल देती है. इस निर्णय से किसानों को अनियमित बीज बाजार की ओर धकेला जाएगा, लागत बढ़ेगी, उत्पादकता घटेगी और कपास उत्पादन में गिरावट से राज्य की जीडीपी व ग्रामीण रोजगार पर गंभीर असर पड़ेगा.
किसान संगठन ने स्पष्ट किया कि कपास एक औद्योगिक कच्चा माल है, जो देश में दूसरे सबसे बड़े रोजगार का स्रोत है. संगठन ने सरकारी अधिकारियों से अपील की कि वे ऐसी नीतियों का हिस्सा न बनें जो नवाचार को रोकती हैं और उत्पादन घटाती हैं. यदि राज्य प्रतिबंध चुनेगा, तो किसान प्रतिरोध का मार्ग अपनाएंगे.
पाइंटरसंगठन की मांग एचटीबीटी बीजों पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाए. किसानों को आधुनिक तकनीक उपयोग की स्वतंत्रता दी जाए. प्रतिबंधों की जगह उत्पादकता और बाजार सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाए.