अकोला. आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर में विट्ठल भक्तों की भारी भीड़ होती हैं. उसी भक्तिमय माहौल के साथ और वही उत्साह हर साल पुराना शहर के विट्ठल मंदिर में अनुभव होता है. यहां पुराना शहर का यह विट्ठल मंदिर 318 साल पुराना है और 1933 से यहां विभिन्न उत्सवों के साथ अखंड हरिनाम सप्ताह का आयोजन किया जाता रहा है.
समर्थ रामदास स्वामी द्वारा पुराना शहर में स्थापित काला मारोती मंदिर, शहर का आराध्य राजराजेश्वर मंदिर के साथ साथ तीन सौ साल से अधिक पुराना प्राचीन विट्ठल मंदिर प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना दिवंगत पोपटलाल अग्रवाल के पूर्वजों ने की थी. 1933 से यहां अखंड हरिनाम सप्ताह और विभिन्न उत्सवों की शुरुआत हुई है. तात्यासाहब देशपांडे इस हरिनाम सप्ताह के अग्रदूत थे. उस दौरान पुराने भारतीय महिला शारदा मंडल ने यहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए थे.
इन उत्सवों को संस्थान के अध्यक्ष दिवंगत वासुकाका ओक ने आगे बनाए रखा. उनके बाद दिवंगत नानासाहब चिने, दिवंगत गोविंदराव भौरदकर, दिवंगत एम.एस. जोशी, दिवंगत दादासाहब देशपांडे, दिवंगत भगवानदास पटेल, सुरेश अहेर ने कार्यभार संभाला. और अब संगठन के प्रभारी विधायक गोवर्धन शर्मा हैं.
आषाढ़ी एकादशी के बाद के चार महीनों में, यानि चातुर्मास में मंदिर में नाम संकीर्तन किया जाता था. यह शहर का सबसे बड़ा और एकमात्र विट्ठल मंदिर था इसलिए आषाढ़ी में इस मंदिर में बहुत भीड़ हुआ करती थी. मंदिर में उत्सव के दौरान शहर और देश भर से कीर्तनकरों ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज की है. साथ ही मंदिर में प्रवचन, हरिपाठ, भजन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
विट्ठल मंदिर संस्थान सामाजिक प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को आयोजित करता है. जब पुणे में पनाशेत बांध टूट गया और पुणे के लोग संकट में थे, संस्थान ने प्रवचनों और कीर्तनों से निधि एकत्र किया और उन्हें मदद के लिए भेजा था. साथ ही फरवरी 2022 में 700 श्रमिक भाइयों और बहनों को मुफ्त ई-लेबर कार्ड दिए गए हैं.
सन 2001 में भक्तों ने 13 करोड़ नाम जाप का संकल्प लेकर 65 करोड़ ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का जाप पूरा किया है. इसी तरह सन 2002 में 16 करोड़ ओम नम: शिवाय का जाप, कोरोना के बाद सभी मंदिरों को खोलने के बाद दिल्ली के स्वामी राजहंस महाराज की 111 वीं जयंती के अवसर पर संगीतमय भागवत कथा, ग्रंथडिंडी, भागवताचार्य श्री दत्त गुरु महाराज की भागवत कथा की गयी हैं.