अकोला में अमृत योजना चरण-2 का काम ठप: 21 गांवों की जलापूर्ति अटकी; 3 से 5 साल की देरी होने की आशंका

Akola Amrut Yojana: अकोला में अमृत योजना चरण-2 के तहत जलापूर्ति का काम ठप हो गया है। तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से परियोजना में तीन से पांच साल की देरी होने की आशंका है।
Amrut Phase-2 water supply project stalled in Akola due to delayed approvals and halted works. Project completion may face a setback of 3 to 5 years.
जलापूर्ति योजना, पाइपलाइन (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Akola Water Supply Project: भूमिगत गटर योजना के बाद अब अमृत योजना चरण-2 अंतर्गत जलापूर्ति का काम भी ठप पड़ गया है। बारिश के कारण जॅकवेल का काम रोक दिया गया, लेकिन पानी की पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी अब तक शुरू नहीं हुआ है।

अमृत योजना के पहले चरण में जलापूर्ति के कार्य पूरे होने के बाद महापालिका ने बढ़े हुए क्षेत्र में जलापूर्ति तथा जिगांव परियोजना से शहर तक पानी लाने के लिए 827 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव को तकनीकी मंजूरी भी मिली थी। लेकिन दूसरे चरण में जलापूर्ति योजना का अनुमानित खर्च 300 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इसी कारण अमृत योजना की शिखर समिति ने इसे मंजूरी नहीं दी।

समिति ने तीन अलग प्रस्ताव तैयार करने को कहा, जिनमें से एक को अमृत योजना में मंजूरी मिली और अन्य दो प्रस्ताव नगरोत्थान योजना में भेजे गए।दूसरे चरण में अधिकांश काम सीमा विस्तार के बाद शामिल हुए 21 गांवों में किए जाने हैं। इसमें पानी की पाइपलाइन बिछाना, जलकुंभ निर्माण, जलशुद्धिकरण केंद्र स्थापित करना, स्कॉडा ऑटोमेशन प्रणाली लागू करना आदि कार्य शामिल हैं।

217.51 करोड़ रुपये की योजना के तहत सबसे पहले पहुरपूर्णा नदी किनारे जॅकवेल का काम शुरू किया गया। भूमि संबंधी प्रश्न सुलझने के बाद कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन बारिश के कारण इसे रोकना पड़ा। वहीं पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम अब तक क्यों शुरू नहीं हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। अकोला महापालिका अधिकारियों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। योजना का कार्य लेने वाली कंपनी ने जून में ही बारिश का हवाला देकर जॅकवेल का काम रोक दिया था, जबकि उस समय और अब भी बारिश नहीं हुई।

काम में देरी, प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी

जलापूर्ति योजना के शेष कार्यों के लिए नगरोत्थान योजना में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन यह मंजूर नहीं हुआ। अब 524 करोड़ रुपये का प्रस्ताव महाराष्ट्र अर्बन वॉटर सप्लाई सॅनिटेशन रीयूज प्रोग्राम अंतर्गत दाखिल किया गया है। इसमें महापालिका को 30% हिस्सा वहन करना होगा। इस प्रस्ताव को भी अभी मंजूरी नहीं मिली है। परिणामस्वरूप जलापूर्ति योजना का काम पूरा होने में तीन से पाँच वर्ष लगने की संभावना है।

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