Akola News: अकोट तहसील के पुंडा गांव की पिछड़े वर्ग की बस्ती में पिछले 25 दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद है. प्रशासनिक लापरवाही और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण मजीप्रा व ग्राम पंचायत के बीच समन्वय की कमी के कारण सैकड़ों नागरिक भीषण प्यास से जूझ रहे हैं.
गांव के अन्य हिस्सों में पानी मिल रहा है, लेकिन पिछड़ा वर्ग की बस्ती को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. तेज धूप और 40 डिग्री तापमान में महिलाएं मजबूर होकर गांव के पास स्थित तालाब से पानी ला रही हैं. यह पानी गंदा और दूषित है, जो मूलतः पशुओं के लिए है.
मजबूरी में यही पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है. इस संदर्भ में पुंडा गांव के नागरिक नंदकिशोर कलाने ने बताया कि, 25 दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है. हमें तालाब से दूषित पानी लाना पड़ रहा है. यदि प्रशासन ने तुरंत पानी नहीं दिया तो हम तीव्र आंदोलन करेंगे.
वहीं मजीप्रा अकोट के उप विभागीय अभियंता निखिल राऊत का कहना है कि, प्राधिकरण से सप्ताह में दो दिन पानी छोड़ा जाता है, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर वितरण का ठोस नियोजन नहीं होने से पिछड़े वर्ग की बस्ती तक पानी नहीं पहुंचता. तकनीकी दोष दूर करना आवश्यक है.
पुंडा गांव के उपसरपंच सुधाकर पाटिल पुंडकर का कहना है कि मजीप्रा से पानी छोड़ने का समय बहुत कम है और दबाव भी कमजोर रहता है. इसी कारण पूरे गांव में समान रूप से पानी नहीं पहुंचता. प्रशासन को तुरंत दबाव बढ़ाकर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना चाहिए.
इस तरह पुंडा गांव की पिछड़ा वर्ग की बस्ती में पानी की गंभीर समस्या ने नागरिकों को आंदोलन की चेतावनी देने पर मजबूर कर दिया है. अब जिलाधिकारी के हस्तक्षेप की मांग की जा रही है ताकि प्यासे नागरिकों को राहत मिल सके.