Akola Religious Events News: फाल्गुन वद्य षष्ठी के अवसर पर सोमवार को संत एकनाथ महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर अकोला जिले सहित विदर्भ के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
पैठण स्थित गोदावरी तट पर संत एकनाथ महाराज की समाधि स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। वहीं अकोला सहित विदर्भ के विभिन्न जिलों में वारकरी मंडलियों द्वारा भजन, कीर्तन और प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वारकरी परंपरा में संत एकनाथ षष्ठी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन संत एकनाथ महाराज ने विठ्ठल नामस्मरण करते हुए सदेह जलसमाधि ली थी। पैठण में सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगने की उम्मीद है।
गोदावरी तट पर स्थित समाधि स्थल पर पूजाअर्चना की जाएगी। इस दौरान संत साहित्य का पाठ, ‘भावार्थ गीता’ और ‘भावार्थ रामायण’ के श्लोकों का वाचन भी होगा। डोंगरगांव, नांदेड, परभणी, अकोला और बुलढाना से आने वाली वारकरी मंडलियां सामूहिक कीर्तन प्रस्तुत करेंगी।
श्रद्धालु ‘विठ्ठल विठ्ठल जय हरि विठ्ठल’ के गजर से वातावरण को भक्तिमय बनाएंगे। शहर और जिले में भी संत एकनाथ षष्ठी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है।
स्थानीय वारकरी मंडलियां संत एकनाथ महाराज की जीवनी तथा उनके समाज सुधारक कार्यों पर प्रवचन देंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। साथ ही किसान और युवा संत की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लेंगे।
संत एकनाथ महाराज ने अपने जीवनकाल में ‘भावार्थ गीता’, ‘भावार्थ रामायण’ और ‘रुक्मिणी स्वयंवर’ जैसे ग्रंथों की रचना कर जनमानस को सरल भाषा में धर्म और अध्यात्म का मार्ग दिखाया। उन्होंने समाज में समानता, सेवा और भक्ति का संदेश दिया। आज भी संत एकनाथ षष्ठी का पर्व वारकरी परंपरा और ग्रामीण समाज के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।