Akola News: नीलेश देव मित्र मंडल द्वारा आयोजित रामकथा के तीसरे दिन प्रसिद्ध रामकथाकार डॉ. भूषण फडके ने अरण्यकांड और किष्किंधाकांड के प्रसंगों का जीवनमूल्यों से संबंध जोड़ते हुए प्रेरणादायी निरूपण किया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य ही सच्चा परमार्थ है और अपनी सुप्त सामर्थ्य की पहचान ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने जांबुवंत द्वारा हनुमान को उसकी विस्मृत शक्ति का स्मरण कराने का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि नकारात्मक सोच और भय के कारण व्यक्ति अपनी क्षमताओं को भूल जाता है। आत्मशक्ति की पहचान होते ही सफलता के द्वार खुल जाते हैं।
निरूपण के दौरान रामायण के अरण्यकांड में श्रीराम का दंडकारण्य प्रवेश, जटायु से भेंट, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और शबरी के आतिथ्य का उल्लेख किया गया। वहीं किष्किंधाकांड में श्रीराम-सुग्रीव भेंट, वाली वध, सुग्रीव का राज्याभिषेक, सीता की खोज और हनुमान के उड्डयन प्रसंगों को दत्त परंपरा की शिक्षाओं से जोड़ा गया।
उन्होंने कहा कि श्रीराम मर्यादा और धर्म के प्रतीक हैं, जबकि दत्तात्रेय ज्ञान और गुरुतत्त्व के प्रतीक माने जाते हैं। जटायु का बलिदान कर्तव्यनिष्ठा और भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है। वहीं बाली प्रसंग के माध्यम से उन्होंने अधर्म के परिणामों को स्पष्ट करते हुए कहा कि गलत कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
कार्यक्रम में निखिल देशमुख, वैशाली फडके और देवाशीष फडके ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “निघालो घेऊन दत्ताची पालखी”, “मन हो रामरंगी रंगले” और “श्रीराम गजर” जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
नीलेश देव मित्र मंडल के सुव्यवस्थित आयोजन से बिर्ला मंदिर परिसर राममय और दत्तमय हो गया। रामकथा के माध्यम से श्रोताओं को धर्म, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मविश्वास का प्रेरणादायी संदेश प्राप्त हुआ।