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न्यू तापड़िया नगर रेलवे ओवरब्रिज का लंबे समय से अधूरा पड़ा काम अब युद्धस्तर पर शुरू किया गया है।
डवोकेट नरेंद्र बेलसरे ने पुल निर्माण में देरी को लेकर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की थी।
सार्वजनिक निर्माण विभाग ने न्यायालय में बताया कि रेलवे प्रशासन को पुल निर्माण के लिए पहले ही 24 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।
New Tapadia Nagar Railway Overbridge Construction: पिछले 8 वर्षों से अटके न्यू तापड़िया नगर रेलवे ओवरब्रिज (गेट क्र।38) के मामले में जनहित याचिका की सुनवाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में चल रही सुनवाई और कानूनी दबाव के बीच रेलवे प्रशासन ने आखिरकार पुल को जोड़ने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
इससे इस पुल के पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहे शहरवासियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। न्यू तापड़िया नगर रेलवे ओवरब्रिज का काम लंबे समय से अधूरा होने के कारण नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग ने न्यायालय में लिखित शपथपत्र प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि पुल के निर्माण कार्य के लिए रेलवे प्रशासन को पहले ही 24 करोड़ रु. दिए जा चुके हैं।
इसके बाद भी रेलवे प्रशासन से समय-समय पर संपर्क करने के बावजूद सकारात्मक प्रतिसाद नहीं मिला। इस खुलासे से रेलवे और सार्वजनिक निर्माण विभाग के बीच समन्वय की कमी सामने आई है। रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक अपना पूरा कानूनी पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से पहले ही पुल के जोड़ने का काम तेज कर दिया गया है।
इसे न्यायालय में चल रही सुनवाई और कानूनी दबाव के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। पुल के जोड़ने का काम शुरू होने के कारण न्यू तापड़िया नगर स्थित रेलवे गेट क्रमांक 38 को फिलहाल 6 दिनों के लिए बंद किया गया है। इससे नागरिकों को असुविधा हो रही है, लेकिन लंबे समय बाद प्रत्यक्ष रूप से काम शुरू होने से क्षेत्र के लोगों में संतोष है। दिवाली के बाद जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई होगी।
हुए क्षेत्र के एड. नरेंद्र बेलसरे ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की थी। फिलहाल इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष चल रही है। इस याचिका में भुसावल रेलवे मंडल के महाप्रबंधक, केंद्रीय रेल मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार के सचिव, जिलाधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग को प्रतिवादी बनाया गया है।