अकोला: मोर्ना नदी में फिर फैली जलकुंभी, मच्छरों के प्रकोप से नागरिक परेशान; प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल

Akola River:अकोला की मोर्ना नदी में जलकुंभी फैलने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है महापौर शारदा खेडकर की चेतावनी के बाद भी प्रशासन की निष्क्रियता से दर्जनों बस्तियों के नागरिक बीमारियों के साये में हैं।
Water hyacinth covers Akola's Morna river, leading to a massive mosquito surge. Despite Mayor Sharda Khedkar's orders, administrative delay in cleaning has sparked public health concerns.
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौजन्य-नवभारत)
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Akola Nagar Nigam Jalpurni Issue: अकोला शहर के मध्य से बहने वाली मोर्ना नदी में इस वर्ष भी जलकुंभी (जलपर्णी वनस्पति) बड़े पैमाने पर फैल गई है। शहर के अनेक नालों का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़े जाने से हर साल गर्मियों की शुरुआत में जलकुंभी फैलती है। इस बार भी वही दृश्य देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि कुछ दिन पहले ही नव-नियुक्त महापौर शारदा खेडकर ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जलकुंभी फैलने से पहले ही उपाययोजना की जाए।

लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते अब नदी पात्र में जलकुंभी फैलकर नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। जलकुंभी के कारण गुलजार पुरा, अगरवेस, जयहिंद चौक, हरिहरपेठ, रमाबाई आंबेडकर नगर, गीता नगर, बलोदे ले-आउट, कैलास टेकड़ी, अनिकट, कमला नेहरू नगर, रजपुतपुरा, खोलेश्वर, रामनगर और दगडीपुल, नायगांव जैसे क्षेत्रों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। हजारों नागरिक इससे त्रस्त हैं और मच्छरों के कारण विभिन्न बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

हर साल जलकुंभी हटाने का काम किया जाता है, लेकिन इस बार प्रशासन की निष्क्रियता से समस्या और गंभीर हो गई है। महापौर की चेतावनी के बावजूद जलकुंभी हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब नदी पात्र में जलकुंभी बड़े पैमाने पर फैल चुकी है और नागरिकों को मच्छरों के प्रकोप से जूझना पड़ रहा है।

क्या इस बार भी ठेके पर होगा काम

पिछले तीन-चार वर्षों से अकोला मनपा की ओर से जलकुंभी हटाने का काम सीधे किया जाता रहा है और वह भी कम खर्च में। लेकिन अब मनपा में कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। ऐसे में यह निर्णय कार्यकारिणी को लेना होगा कि जलकुंभी हटाने का काम मनपा स्वयं करेगी या ठेके पर दिया जाएगा। इसी कारण प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। नदी पात्र में जलकुंभी फैलने से नागरिकों की परेशानी बढ़ गई है और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि कार्यकारिणी इस समस्या पर क्या निर्णय लेती है और नागरिकों को कब राहत मिलती है।

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