

Land Mafia Encroachment In Alola: अकोला महानगरपालिका क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। शहर के आम नागरिकों के हक और उनके मनोरंजन के लिए आरक्षित की गई 'ओपन स्पेस' की कीमती जमीनों को भूमाफियाओं द्वारा पूरी तरह से निगल जाने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। एक आंतरिक प्रशासनिक समीक्षा में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अकोला शहर के विभिन्न रिहायशी लेआउट में स्थित 50 से अधिक महत्वपूर्ण ओपन स्पेस अब वास्तविक रूप से जमीन पर बचे ही नहीं हैं।
इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन चोरियों को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए 130 से अधिक ओपन स्पेस के मुख्य सरकारी नक्शे ही मनपा और नगर रचना विभाग के रिकॉर्ड रूम से पूरी तरह गायब कर दिए गए हैं। इस बड़े खुलासे के बाद शहर के प्रशासनिक महकमे, भूमि प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आमतौर पर किसी भी शहरी रिहायशी कॉलोनी या लेआउट में 'ओपन स्पेस' को इसलिए आरक्षित रखा जाता है ताकि वहां भविष्य में हरित क्षेत्र विकसित किया जा सके, बच्चों के लिए खेलने का मैदान बन सके और बुजुर्ग नागरिकों के टहलने व मनोरंजन की व्यवस्था हो सके। लेकिन अकोला शहर के इन प्राइम लोकेशन के प्लॉटों पर अब या तो अवैध रूप से पक्के निर्माण खड़े हो चुके हैं या फिर उन पर पूरी तरह से अतिक्रमण कर लिया गया है। सरकारी फाइलों और पुराने भूखंडों के अभिलेखों में तो इन स्थानों का स्पष्ट उल्लेख 'ओपन स्पेस' के रूप में ही दर्ज है, लेकिन जब अधिकारी मौके पर मुआइना करने पहुंचे तो वहां की जमीनी हकीकत देखकर दंग रह गए। मनपा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुल 468 स्वीकृत लेआउट्स की जब बारीकी से प्रशासनिक समीक्षा की गई, तो उसमें से सीधे 50 बड़े ओपन स्पेस का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके साथ ही 130 भूखंडों के मूल नक्शों का फाइलों से गायब मिलना इस बात की तरफ सीधा इशारा करता है कि इन आरक्षित कीमती टुकड़ों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध रूप से बेच दिया गया है।
इस महाघोटाले की आंच अकोला के लगभग सभी प्रमुख और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों तक पहुंच चुकी है। प्राप्त विवरण के अनुसार, शहर के शिलोडा, हिंगणा-म्हैसपुर, डाबकी, उमरी, कौलखेड़ और खड़की बुजुर्ग जैसे महत्वपूर्ण पॉश और बाहरी क्षेत्रों के अनेक सर्वे नंबरों से जुड़े मास्टर नक्शे और लेआउट प्लान रिकॉर्ड रूम से नदारद हैं। नगर नियोजन के जानकारों का कहना है कि मूल नक्शों के न होने का सीधा फायदा उठाकर भूमाफिया अब इन खाली जगहों पर धड़ल्ले से नई अवैध प्लॉटिंग और बिना परमिशन की बिल्डिंगों का निर्माण कर रहे हैं।
भूमि प्रबंधन और टाउन प्लानिंग विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि में परिवर्तित कर वहां नया रिहायशी लेआउट विकसित करते समय भूमि अभिलेख विभाग, संबंधित उपविभागीय अधिकारी और महानगरपालिका की त्रिकोणीय और सबसे महत्वपूर्ण जवाबदेही होती है। लेआउट को अंतिम मंजूरी देते वक्त भूमि अभिलेख विभाग ही पैमाइश करके कॉलोनी की आंतरिक चौड़ी सड़कें, नालियां और ओपन स्पेस की सीमाएं निर्धारित करता है।
इतिहास खंगालें तो पता चलता है कि वर्ष 2002 से पहले तक लेआउट और एनए की यह सारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूरी तरह से उपविभागीय अधिकारी के प्रशासनिक दायरे में आती थी, जबकि साल 2002 के बाद इस पूरी प्रक्रिया को सीधे महानगरपालिका आयुक्त के स्तर पर संचालित और मॉनिटर किया जाने लगा। ऐसे में दो अलग-अलग कालखंडों के दौरान किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों के संरक्षण में ये कीमती सरकारी नक्शे गायब हुए और फाइलें दबाई गईं, इसकी एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी हो गया है।